110वीं जयंती पर शहनाई सम्राट उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के मजार पर प्रशंसक पहुंचे,चढ़ाए अकीदत के फूल
—उस्ताद काशी की पहचान और गंगा-जमुनी तहज़ीब के जीवंत प्रतीक थे : अजय राय
वाराणसी, 21 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में शहनाई सम्राट भारतरत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की 110वीं जयंती शनिवार को मनाई गई। दरगाहे फातमान स्थित उनकी मजार पर अकीदत के फूल चढ़ाने के लिए परिजनों के साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय भी पहुंचे। मजार पर पुष्प अर्पित कर अजय राय ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान महान शहनाई वादक और काशी की पहचान और गंगा-जमुनी तहज़ीब के जीवंत प्रतीक थे। उनकी शहनाई की मधुर धुनों ने काशी को पूरी दुनिया में एक अलग पहचान दिलाई । उस्ताद का काशी और माँ गंगा से गहरा आध्यात्मिक संबंध था। अक्सर वह गंगा किनारे बैठकर घंटों शहनाई का रियाज किया करते थे। उनकी साधना में काशी के घाटों की आध्यात्मिकता, मंदिरों की घंटियां और गंगा की लहरों की पवित्रता घुली हुई महसूस होती थी। बिस्मिल्लाह ख़ान साहब का संपूर्ण जीवन गंगा-जमुनी तहज़ीब को संजोने और उसे मजबूत करने में समर्पित रहा। उन्हें होली के रंग और ईद की खुशियों से समान लगाव था। वह होली और ईद दोनों पर्वों को पूरे उत्साह के साथ मनाते थे अजय राय ने कहा कि उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान एकता, भाईचारे और सद्भावना मिसाल थे। उनकी शहनाई की धुनें केवल संगीत नहीं थीं, बल्कि वह प्रेम, सौहार्द और इंसानियत का संदेश देती थीं।
उन्होंने अपने जीवन और कला के माध्यम से यह साबित किया कि काशी की असली पहचान उसकी साझा संस्कृति, आपसी सम्मान और गंगा-जमुनी तहज़ीब में बसती है। उस्ताद की मजार पर पहुंचे अन्य कांग्रेस पदाधिकारियों ने भी उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। इसमें पार्टी के स्थानीय महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे,सफक रिजवी,प्रिंस राय खगोलन, शकील जादूगर, विश्वनाथ कुँवर, किशन यादव आदि शामिल रहे।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी