वाराणसी सहित उत्तर प्रदेश की सात विभूतियां पद्म सम्मान से सम्मानित, उत्कृष्ट योगदान के लिए मिला सम्मान

 


वाराणसी, 25 मई (हि.स.)। राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में सोमवार को आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित किया। इस अवसर पर वाराणसी सहित उत्तर प्रदेश से जुड़े सात विशिष्ट व्यक्तित्वों को कला, खेल, पुरातत्व, चिकित्सा, कृषि विज्ञान और आयुर्वेद के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्म विभूषण एवं पद्म श्री पुरस्कार प्रदान किए गए।

भारतीय शास्त्रीय संगीत की सुप्रसिद्ध वायलिन वादक डॉ. एन. राजम् को कला क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए पद्म विभूषण से अलंकृत किया गया। “सिंगिंग वायलिन” के नाम से विख्यात डॉ. राजम् ने वायलिन पर हिंदुस्तानी गायन शैली की “गायकी अंग” तकनीक को विकसित कर भारतीय शास्त्रीय संगीत को नई पहचान दी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और डीन के रूप में उन्होंने संगीत शिक्षा को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

खेल जगत में देश का गौरव बढ़ाने वाले पैरा हाई जंपर प्रवीण कुमार को पद्म श्री से सम्मानित किया गया। विश्व नंबर-1 पैरा हाई जंपर के रूप में स्थापित प्रवीण कुमार ने टोक्यो पैरालंपिक में रजत और पेरिस पैरालंपिक 2024 में स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया।

पुरातत्व एवं सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रो. बुद्ध रश्मि मणि को पद्म श्री प्रदान किया गया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और राष्ट्रीय संग्रहालय में विभिन्न जिम्मेदार पदों पर रहते हुए उन्होंने अयोध्या, सारनाथ और कपिलवस्तु सहित कई ऐतिहासिक स्थलों के उत्खनन का नेतृत्व किया। उनके शोध कार्यों ने भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक विरासत अध्ययन को नई दिशा प्रदान की।

चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए प्रो. राजेंद्र प्रसाद को पद्म श्री से सम्मानित किया गया। तपेदिक उन्मूलन और पल्मोनरी मेडिसिन के क्षेत्र में उन्हें वैश्विक विशेषज्ञ माना जाता है। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में उन्होंने देश का पहला मेडिकल कॉलेज आधारित डीओटीएस केंद्र स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कृषि अनुसंधान एवं विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए डॉ. अशोक कुमार सिंह को पद्म श्री प्रदान किया गया। उन्होंने बासमती धान की उन्नत और रोग प्रतिरोधी किस्मों के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई, जिससे किसानों की आय और भारत के बासमती निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

संक्रामक रोगों, विशेषकर काला-अजार के उपचार एवं अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले प्रो. श्याम सुन्दर को भी पद्म श्री से सम्मानित किया गया। उनके शोध कार्यों के आधार पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नई उपचार पद्धतियों को अपनाया। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में उनके नेतृत्व में काला-अजार अनुसंधान को वैश्विक पहचान मिली।

आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए डॉ. केवल कृष्ण ठकराल को पद्म श्री प्रदान किया गया। उन्होंने ‘क्षार सूत्र’ चिकित्सा पद्धति और ‘कर्मवेधन’ जैसी आयुर्वेदिक शल्य प्रक्रियाओं को लोकप्रिय बनाकर आयुर्वेदिक सर्जरी को व्यापक स्वीकार्यता दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी