शारदीय नवरात्र में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के सान्निध्य में होगा नवचंडी पाठ, गौमाता को राष्ट्रमाता बनाने का लिया जाएगा संकल्प

 


वाराणसी, 09 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी काशी के शंकराचार्यघाट स्थित श्रीविद्यामठ में शारदीय नवरात्र उत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। 11 से 20 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस उत्सव में ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के सान्निध्य में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। इस दौरान गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने और गोवंश के प्राणों की रक्षा के संकल्प के साथ वैदिक आचार्यों द्वारा नवचंडी पाठ किया जाएगा।

शुक्रवार को शंकराचार्य के प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी संजय पांडेय ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक श्रीविद्यामठ में नवरात्र के विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती प्रतिदिन भगवती राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी का विशेष पूजन-अर्चन करेंगे। साथ ही श्रीविद्या साधना शिविर का आयोजन भी होगा, जिसमें देशभर से शंकराचार्य के दीक्षित शिष्य और संत शामिल होंगे।

——वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होगा नवचंडी पाठ

नवरात्र के दौरान प्रतिदिन सुबह आठ बजे से काशी के श्रेष्ठ वैदिक आचार्यों की देखरेख में नवचंडी पाठ किया जाएगा। यह अनुष्ठान गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने और गोवंश की रक्षा के उद्देश्य से संपन्न होगा। इसके अतिरिक्त प्रतिदिन शंकराचार्य के सान्निध्य में श्रीविद्या साधना और धार्मिक अध्ययन के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

——पूजन, शास्त्र पाठ और प्रवचन का होगा आयोजन

मठ के मीडिया प्रभारी के अनुसार, प्रतिदिन सुबह 7:30 से 8 बजे तक श्रीविद्या का अध्ययन होगा। इसके बाद सुबह आठ से 9:30 बजे तक शंकराचार्य के सान्निध्य में प्रस्थानत्रयी का पाठ संपन्न किया जाएगा। सुबह 9:45 बजे श्रीविष्णु पूजन के बाद दोपहर 12 से शाम चार बजे तक भगवती त्रिपुर सुंदरी की विशेष पूजा-अर्चना होगी। इस दौरान प्रतिदिन नौ द्रव्यों से भगवती का अर्चन किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि शाम पांच बजे से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती भगवती की लीलाओं पर आधारित प्रवचन देंगे। इसके बाद शाम सात बजे भगवती की महाआरती होगी। नवरात्र उत्सव के दौरान श्रीविद्यामठ में धार्मिक अनुष्ठानों, वैदिक पाठ, साधना और प्रवचनों के माध्यम से भक्तिमय वातावरण रहेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी