तीन दिवसीय रथयात्रा मेले की शुरूआत मंगला आरती से

 






—रथयात्रा और आसपास के इलाके में सजी दुकानें,भोर में ही भगवान जगन्नाथ, भैया बलभद्र और बहन सुभद्रा के खास काष्ठ विग्रह को अष्टकोणीय रथ पर विराजमान कराया लाएगा

वाराणसी,15 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी काशी के तीन दिवसीय रथयात्रा मेले की शुरूआत गुरूवार तड़के से होगी। मेले में आधी रात के बाद भगवान जगन्नाथ, भैया बलभद्र और बहन सुभद्रा के खास काष्ठ विग्रह को अष्टकोणीय रथ पर विराजमान कराया लाएगा। भोर में विग्रहों को पीतांबर वस्त्र धारण कराया जाएगा। स्वर्ण मुकुट एवं आभूषण पहनाने के साथ बेला, गुलाब, चंपा, चमेली, तुलसी की मालाओं से विधिवत श्रृंगार कर भोग लगाने के बाद अलसुबह 5.15 मिनट पर मंगलाआरती के बाद मौजूद भक्त परम्परानुसार प्रभु का रथ दो पग खीचेंगे। इसके बाद भगवान के अलौकिक झांकी के दर्शन के लिए रथ के पट खोल दिए जाएंगे और दर्शन पूजन का सिलसिला शुरू हो जाएगा। भगवान का रथ छूकर श्रद्धालु श्रद्धाभाव से प्रभु को फल-पुष्प और तुलसी की माला अर्पित करेंगे। दिन में 12 बजे भगवान की भोग आरती होगी। तीन दिवसीय रथयात्रा मेले के एक दिन पहले से ही मेला क्षेत्र में रौनक बढ़ गई है। मेला क्षेत्र में विद्युत झालरों की सजावट के बीच अस्थाई दुकानें सज चुकी है। खिलौना,झूला वाले भी मेला क्षेत्र में पहुंच गए है। बुधवार को पूरे दिन दुकानदार अपनी दुकानों को सजाने में लगे रहे। भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन अलर्ट मोड में है।

बताते चलें कि रथयात्रा मेले के पहले 14 पहियों वाला अष्टकोणीय रथ को रंगरोगन के बाद तैयार किया गया। रथ के शिखर पर पीतल के कलश, प्रभु का सुदर्शन चक्र और हनुमान ध्वज लहराएगा। अस्सी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर के महंत राधेश्याम पांडेय के अनुसार,रथ के ऊपर त्रिकोणीय ध्वज, अष्टकोणीय छतरी, नीले और सफेद रंग के छाते व शंखाकार झंडे, चांदी के डंडे में पांच फीट ऊंचा और तीन फीट लंबा त्रिकोणीय चांदी का ध्वज और सुदर्शन चक्र लगाया जाएगा। भगवान के रथ में 12 तीलियों वाले 14 लोहे के पहिये हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी