काशी ज्ञान, अध्यात्म और भारतीय परंपराओं की भूमि : राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल
—काशी की शास्त्रार्थ परंपरा को देशभर में विस्तार देने की जरूरत : बीएचयू कुलपति
वाराणसी, 26 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में महर्षि पतंजलि के जन्म जयंती महोत्सव के अवसर पर वैदिक विज्ञान केंद्र सभागार में विद्वत सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश नागकूप शास्त्रार्थ समिति, वाराणसी और वैदिक विज्ञान केंद्र, बीएचयू के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल शामिल हुए। समारोह में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने काशी को ज्ञान, अध्यात्म और भारतीय परंपराओं की भूमि बताते हुए शास्त्रार्थ एवं विद्वत परंपरा को आगे बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने संस्कृत के व्यवहारिक प्रयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि काशी की शास्त्रार्थ परम्परा के बारे में सुना था। जब प्रो. रामनारायण द्विवेदी हैदराबाद में इस कार्यक्रम की तिथि निश्चित करने के लिए उपस्थित हुए थे ।लेकिन आज इस सभागार में अभिनन्दनीय (14) विद्वानों तथा 50 शास्त्रार्थी छात्रों को जब सम्मान पत्र दिया तो मुझे एहसास हुआ कि काशी की यह शास्त्रार्थ परम्परा दुनिया के लिए उदाहरण है ।जिस प्रकार से देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने काशी का विस्तार किया है । चाहे वह काशी
विश्वनाथ धाम हो चाहे काशी के घाट और शिक्षण संस्थान हो। उनके संसदीय क्षेत्र काशी की शास्त्रार्थ परम्परा का विशाल ज्ञान का स्वरूप भी विकसित हो रहा है। श्री काशी विद्वत्परिषद् के मंच पर काशी के संत तथा काशी के विद्वान एक साथ दिखाई दे रहे है । यह काशी का परम वैभव है।
इस परम्परा को देश के अन्य राज्यों मे भी विकसित करने की आवश्यकता है
वैश्विक स्तर पर इस परम्परा को संतों के आशीर्वाद से जीवन्त किया जाना चाहिए । देश के प्रधानमंत्री के नेतृत्व में यह शास्त्रार्थ परम्परा वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए काशी के बुद्धजीवी और संस्कृतनुरागी जनों को एकजुट होने की जरूरत है।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री व वाराणसी शहर दक्षिणी के विधायक डॉ नीलकंठ तिवारी ने कहा कि शास्त्रार्थ केवल अतीत की परंपरा नहीं, बल्कि ज्ञान के निरंतर विकास का माध्यम है। काशी में आद्य शंकराचार्य को भी शास्त्रार्थ के लिए आना पड़ा था । भगवान बुद्ध सहित सभी संप्रदायों के आचार्यों ने काशी को शास्त्रार्थ भूमि के रूप में स्वीकार किया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि शास्त्रार्थ भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने काशी की ज्ञान और शास्त्रार्थ परंपरा को देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही संस्कृत शिक्षण को नई पीढ़ी के लिए अधिक सहज, रोचक और आकर्षक बनाने की बात कही।
समारोह में शास्त्रार्थ, संस्कृत, भारतीय दर्शन और ज्ञान परंपरा में योगदान के लिए देश के विभिन्न विद्वानों को सम्मानित किया गया। इनमें आचार्य डॉ. पी.के. माधवन, आचार्य कमलेश झा, आचार्य ललित कुमार त्रिपाठी, आचार्य हरिदत्त शर्मा, आचार्य रामपूजन पाण्डेय, आचार्य सुधाकर मिश्र समेत कई विद्वान शामिल रहे। इस अवसर पर विभिन्न सम्मान श्रेणियों के अंतर्गत अन्नपूर्णाजी सम्मान, आचार्य रामप्रसाद त्रिपाठी सम्मान, स्वामी श्रीविद्यानन्द सरस्वती सम्मान, पद्मश्री आचार्य रामचन्द्र शुक्ल सम्मान अभिनन्दनीय (14) विद्वानों तथा 50 शास्त्रार्थी छात्रों को दिया गया। कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन प्रो. विनय कुमार पाण्डेय वैदिक विज्ञान केन्द्र ने किया। कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन काशीविद्वत्परिषद् के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने किया। समारोह में सतुआ बाबा संतोषदास, अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानन्द सरस्वती, धर्मसंघपीठाधीश्वर शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी भी मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी