वाराणसी : लीलाधर के जन्म के उत्सव में डूबा दुर्गाकुंड मणि मंदिर

 




वाराणसी, 04 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में कान्हा के जन्म (श्रीकृष्ण जन्माष्टमी) पर शुक्रवार शाम दुर्गाकुंड धर्मसंघ परिसर स्थित श्रीमणि मंदिर प्रांगण उल्लास में डूबा नजर आया। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर समूचा मणि मंदिर लीलाधर की लीलाओं से अभिमंत्रित नजर आया। भक्तों का उत्साह ऐसा मानो काशी में ही ब्रजधाम उतर आया हो। मन्दिर में लीलाधर की दर्जन भर झाँकिया सबके आकर्षण का केंद्र रही, वहीं मणि मंदिर के प्रतिकृति के साथ सेल्फी लेने की होड़ मची रही। पूरे मन्दिर प्रांगण को रंगबिरंगे विद्युत झालरों से सजाया गया था। कोलकाता से आये कारीगरों ने कामिनी, अशोक की पत्तियों और गुलाब, गेंदे, रजनीगंधा के फूलों से मंदिर को सजाया।

मध्य रात्रि धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज के पावन सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रीकृष्ण का जन्म प्रतीक रूप से किया जाएगा। इस अवसर पर भगवान के विग्रह को सर्वप्रथम पंचामृत स्नान, चंदन से गंधोदक स्नान, नारियल के पानी से गर्भोदक स्नान के उपरांत भस्मोदक स्नान, पुष्पोदक स्नान, तत्पश्चात सेव, अनानास, संतरा, मौसमी, अनार के रस से फालोदक स्नान कराया गया। अंत मे ठाकुर जी का दुर्वोदक एवं कुशोदक स्नान कराया गया। इसके बाद कोलकाता से विशेष रूप से मंगाए गए वस्त्रों से राधा माधव को अलंकृत करने के उपरांत उन्हें विविध स्वर्णाभूषणों से सजाया गया। समस्त आयोजन पं. जगजीतन पाण्डेय के संयोजकत्व में सम्पन्न हुए।

छप्पन भोग के साथ बंटा 101 क्विन्टल हलवा

जन्माष्टमी पर ठाकुर जी को छप्पन भोग लगाया गया। साथ ही 101 क्विन्टल हलवा का भोग लगाकर भक्तों में वितरित किया गया। इस दौरान संगीत के सुरों से भी जन्मोत्सव का उमंग छाया रहा। संगीतकार कृष्णा एवं सहयोगियों द्वारा भजन प्रस्तुत किया गया, सायंकाल 7 बजे से कलाकार अमृत मिश्र, शाम्भवी भट्ट और रजत कुशवाहा एवं सहयोगियों द्वारा कथक पर नृत्य नाटिका प्रस्तुत की गयी। साथ ही शनिष ज्ञावली द्वारा बाँसुरी वादन हुआ। इसके उपरांत रात्रि 9 बजे से मध्यरात्रि तक गायिका शैलबाला का भजन अनवरत चलता रहेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी