वाराणसी : सिद्धपीठ बाबा कीनाराम स्थल में विधि-विधान से हुआ कन्या व भैरव पूजन

 


नवमी पर नौ कन्याओं को देवी और बालक को भैरव स्वरूप में पूजकर लिया आशीर्वाद

वाराणसी, 19 अक्टूबर (हि.स.)। शारदीय नवरात्र की नवमी तिथि पर सोमवार को रविंद्रपुरी स्थित सिद्धपीठ बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड में परंपरानुसार कन्या एवं भैरव पूजन का आयोजन किया गया। पीठाधीश्वर अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम के मार्गदर्शन में संपन्न अनुष्ठान में नौ कन्याओं को देवी स्वरूप तथा एक बालक को भैरव बाबा के स्वरूप में प्रतिष्ठित कर विधि-विधान से पूजन किया गया। इस अवसर पर आश्रम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा परिसर ‘जय मां सर्वेश्वरी’ तथा ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा।

नवमी पूजन की शुरुआत सुबह आश्रम की साफ-सफाई और दैनिक आरती-पूजन के बाद हुई। इसके बाद नौ कन्याओं का श्रृंगार कर उन्हें देवी स्वरूप में तथा एक बालक का श्रृंगार कर भैरव स्वरूप में आसन पर विराजमान कराया गया। पीठाधीश्वर बाबा सिद्धार्थ गौतम राम ने स्वयं सभी कन्याओं और बालक के चरण पखारे। इसके बाद विधि-विधान से उनकी पूजा-अर्चना कर आरती उतारी गई तथा विभिन्न पकवानों का भोग अर्पित किया गया। पूजन के उपरांत श्रद्धालुओं ने कन्याओं और भैरव स्वरूप बालक के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लिया।

पूजन के दौरान नवरात्र अनुष्ठान के आचार्य श्री प्रकाश जी सहित उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालु लगातार ‘जय मां सर्वेश्वरी’ और ‘हर-हर महादेव’ का जयघोष करते रहे। अनुष्ठान के बाद श्रद्धालुओं ने पीठाधीश्वर का दर्शन किया। इसके उपरांत आयोजित भंडारे में हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।

—नवरात्र की नवमी का विशेष महत्व

आश्रम के पदाधिकारी संजय सिंह ने बताया कि प्रत्येक पर्व का अपना विशिष्ट महत्व होता है, लेकिन भगवती के विभिन्न स्वरूपों की आराधना से जुड़ा नवरात्र पर्व विशेष आस्था और उत्साह का प्रतीक है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में श्रद्धालुओं की सहभागिता उनकी अटूट श्रद्धा और विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि नवरात्र के अंतिम दिन नवमी पर होने वाला कन्या पूजन विशेष आकर्षण का केंद्र होता है। उन्होंने बताया कि शारदीय नवरात्र के दौरान मां भगवती के विभिन्न स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। नवमी तिथि पर कन्या एवं भैरव पूजन के साथ ही नवरात्र का समापन हुआ। देशभर की तरह वाराणसी में भी श्रद्धालुओं ने यह पर्व श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी