वाराणसी: शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर मां अन्नपूर्णा के दरबार में उमड़े श्रद्धालु, भक्तों ने टेका मत्था

 


-आधी रात के बाद से ही दर्शन के लिए लगी कतारें, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुई मंगला आरती

— जगत कल्याण के लिए महादेव को अन्नदान देने वाली मां अन्नपूर्णा के दरबार में भक्तों ने की परिक्रमा, सुख-समृद्धि की कामना

वाराणसी, 18 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धर्म नगरी काशी में शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर रविवार को मां अन्नपूर्णा (महागौरी) के दरबार में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए आधी रात के बाद से ही श्रद्धालु कतारबद्ध होने लगे। भोर में मंदिर के पट खुलते ही भक्तों ने मां के दर्शन किए और परिवार की सुख-शांति, समृद्धि एवं वंशवृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर मां के जयकारों से गूंजता रहा।

पंचामृत स्नान के बाद हुआ मां का भव्य शृंगार

महाअष्टमी पर मां के दर्शन-पूजन के लिए मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए गए। शनिवार मध्यरात्रि के बाद मंदिर के महंत शंकर पुरी की देखरेख में मां के विग्रह को पंचामृत स्नान कराया गया। इसके बाद नवीन वस्त्रों और आभूषणों से मां का भव्य शृंगार किया गया। भोग अर्पित करने के पश्चात वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंगला आरती संपन्न हुई।

अलसुबह मंदिर के पट खुलते ही पहले से कतार में खड़े श्रद्धालु दर्शन के लिए गर्भगृह के समीप पहुंचे। भक्तों ने मां के दर्शन कर विधि-विधान से पूजन किया। इस दौरान श्रद्धालु गर्भगृह परिसर की परिक्रमा करते भी नजर आए। महाअष्टमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर मां महागौरी की आराधना की।

सुरक्षा के बीच कतारबद्ध होकर भक्तों ने किए दर्शन

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास की गलियों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। बैरिकेडिंग के बीच भक्त कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। इस दौरान मां के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना रहा। महिलाओं ने विशेष रूप से परिवार में सुख-शांति, खुशहाली और संतान की उन्नति के लिए मां से आशीर्वाद मांगा।

महागौरी की आराधना से पापों से मुक्ति की मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र की अष्टमी तिथि पर मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि मां महागौरी के दर्शन और उपासना से भक्तों के समस्त पाप नष्ट होते हैं तथा उन्हें सुख, शांति और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है।

पौराणिक कथा के अनुसार, देवी ने आठ वर्ष की आयु से ही भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या शुरू कर दी थी। तपस्या के प्रभाव से उनका वर्ण कृष्ण हो गया। देवी की कठिन साधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने गंगाजल से उनके वर्ण को पुनः गौर कर दिया। तभी से देवी महागौरी के नाम से विख्यात हुईं। धार्मिक ग्रंथों में उनकी शक्ति को अमोघ और शीघ्र फल प्रदान करने वाली बताया गया है।

कर्मकांडी आचार्य उदय तिवारी के अनुसार, मां महागौरी अन्नपूर्णा की चार भुजाएं हैं और उनका वाहन वृषभ है। उनके दाहिने हाथों में अभय मुद्रा और त्रिशूल, जबकि बाएं हाथों में डमरू और वर मुद्रा सुशोभित हैं। देवी का स्वरूप अत्यंत शांत और वर्ण श्वेत है। उनके गौर वर्ण की उपमा शंख, चंद्रमा और कुंद के पुष्प से दी जाती है। उनके वस्त्र और आभूषण भी श्वेत माने गए हैं।

अन्नपूर्णा की कृपा से काशी में कोई भूखा न रहे, ऐसी मान्यता

सनातन धर्म में मां अन्नपूर्णा को संसार के भरण-पोषण और अन्न की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि उनकी कृपा से भक्तों के अन्न भंडार सदैव भरे रहते हैं और जीवन में कभी अन्न का अभाव नहीं होता। काशी स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर अपनी धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता के लिए विशेष पहचान रखता है। मान्यता है कि मंदिर का स्वरूप श्री यंत्र की आकृति पर आधारित है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय पृथ्वी पर भयंकर अकाल पड़ने से अन्न और जल का संकट गहरा गया था। तब भगवान शिव ने जगत के कल्याण के लिए मां अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी। देवी ने प्रकट होकर महादेव को अन्नदान दिया और काशी में किसी को भूखा न रहने देने का आश्वासन दिया।

इसी मान्यता के चलते मां अन्नपूर्णा के दरबार में दर्शन-पूजन करने वाले श्रद्धालु देवी के प्रति अपनी अगाध आस्था प्रकट करते हैं। महाअष्टमी पर भी भक्तों ने मां के चरणों में शीश नवाकर परिवार की खुशहाली, सुख-समृद्धि और जीवन में अन्न-धन की निरंतरता का आशीर्वाद मांगा। खास बात यह है कि इस बार महाअष्टमी पर्व खास है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की महाअष्टमी 18 अक्टूबर रविवार को सुबह 8 बजकर 27 मिनट से शुरू हो गई है। जो अगले दिन 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक है। इसके बाद नवमी तिथि आरंभ हो जाएगी। नवमी तिथि 20 अक्टूबर दोपहर 12:50 बजे तक है। ऐसे में उदया तिथि के मान के चलते श्रद्धालु 19 अक्टूबर को भी महाअष्टमी मनाएंगे। सोमवार 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी मनेगी। शारदीय नवरात्रि में महाष्टमी और महानवमी के दिन कन्या पूजन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसलिए इन दो दिनों में आप कन्या पूजन कर सकते हैं। विजयादशमी 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी।----------

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी