गोरक्षा के प्रश्न पर सनातन धर्म के अखाड़े, महामंडलेश्वर और महंत स्पष्ट रुख अपनाएं : शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

 


वाराणसी, 19 फरवरी (हि.स.)। प्रयागराज में आयोजित माघ मेले के मौनी अमावस्या महास्नान पर्व को लेकर उपजा विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। गाेरक्षा और गाेवंश पर ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गुरुवार को वाराणसी के केदारघाट स्थित श्रीविद्यामठ में पत्रकारों से बातचीत की । उन्हाेंने कहा कि सनातन धर्म से जुडे़ लाेग आगे आएं।

शंकराचार्य ने कहा कि सरकार ने प्रतीकात्मक कदम के रूप में ‘गोदान’ फिल्म को टैक्स-फ्री करने की घोषणा तो की, लेकिन उनकी मुख्य मांगों गाय को ‘राज्य माता’ घोषित करने और गोमांस (बीफ) निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया। शंकराचार्य ने भारत सरकार की 20वीं पशुगणना का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में 3.93 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की ‘गंगातीरी’, ‘केनकथा’, ‘खैरगढ़’ और ‘मेवाती’ जैसी देशी नस्लें विलुप्ति के कगार पर हैं।

शंकराचार्य ने सनातन धर्म के अखाड़ों, महामंडलेश्वरों और महंतों से गोरक्षा के प्रश्न पर स्पष्ट रुख अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 40 दिनों की समयसीमा पूरी होने पर आंदोलन के अगले चरण की रूपरेखा सार्वजनिक की जाएगी। गोमाता को उसका अधिकार दिलाकर ही यह आंदोलन थमेगा।-----------------

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी