हर विधानसभा क्षेत्र की गौशालाओं का होगा सर्वे : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
—नीति,नीयत और नतीजे' का दावा खोखला,अब हर विधानसभा क्षेत्र में खुलेगी गो-आश्रय केन्द्रों की पोल
— छात्रों के संघर्ष के परिणामस्वरूप केन्द्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
वाराणसी, 26 जुलाई (हि.स.)। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उत्तर प्रदेश सरकार के गौ-संरक्षण, संवर्धन और गौ-सेवा संबंधी विज्ञापनों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च कर प्रकाशित किए गए सरकारी विज्ञापन वास्तविक स्थिति को छिपाने का प्रयास हैं और इनमें किए गए अधिकांश दावे भ्रामक, तथ्यहीन तथा जमीनी सच्चाई से परे हैं।
रविवार को केदारघाट स्थित श्री विद्यामठ में आयोजित पत्रकार वार्ता में शंकराचार्य ने प्रदेश सरकार के 'नीति, नीयत और नतीजे' के दावे को खोखला बताते हुए कहा कि यह केवल जनता, विशेषकर शहरी समाज को भ्रमित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि गोरक्षपीठ का महंत प्रदेश का मुख्यमंत्री होने के बावजूद उत्तर प्रदेश में गौवंश की स्थिति अत्यंत दयनीय और चिंताजनक बनी हुई है।
—सरकार से पूछे छह सवाल
शंकराचार्य ने सरकार से कई सवाल पूछते हुए आरोप लगाया कि गौ-संरक्षण का दावा करने वाली सरकार के पास विज्ञापन में दिखाने के लिए कोई आदर्श सरकारी गौशाला तक नहीं है, इसलिए निजी गौशाला की तस्वीर का उपयोग किया गया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की पहचान मानी जाने वाली 'गंगातीरी' नस्ल की गाय के बजाय गुजरात की 'गीर' नस्ल की तस्वीर प्रकाशित करना शासन और संबंधित अधिकारियों की अनभिज्ञता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में 7,500 से अधिक गौ-आश्रय स्थलों का दावा वास्तविकता से मेल नहीं खाता। कई अस्थायी आश्रय स्थलों में देशी गायों के साथ जर्सी सांडों को रखा जा रहा है, जिससे नस्ल सुधार के बजाय वर्णसंकरण का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अनेक स्थानों पर गौवंश भूख-प्यास से तड़पकर मरने को विवश है।
योजनाएं केवल कागजों तक सीमित
शंकराचार्य ने कहा कि 'नंदनी कृषक समृद्धि योजना' और 'नंद बाबा योजना' धरातल पर प्रभावी रूप से दिखाई नहीं देतीं। गोबर से ग्रीन एनर्जी और गौ-उत्पाद आधारित उद्योगों के दावों पर भी उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश के किसी भी जिले में इस तरह का कोई सुव्यवस्थित उद्योग या पावर प्लांट नजर नहीं आता।
उन्होंने 12 लाख से अधिक गौवंश के संरक्षण के सरकारी आंकड़ों पर भी प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा कि यदि सरकारी अभियान और जनभागीदारी वास्तव में सफल होती, तो बड़ी संख्या में गौवंश आज भी सड़कों और खेतों में भटकता तथा दुर्घटनाओं का शिकार नहीं होता।
दुग्ध उत्पादन में उत्तर प्रदेश को देश में प्रथम स्थान मिलने के दावे पर उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि इसमें देशी गाय, जर्सी गाय और भैंस का योगदान अलग-अलग कितना है।
—सनातन परंपरा से दूर होती गौ-सेवा
शंकराचार्य ने कहा कि सनातन परंपरा में महाराज दिलीप, महर्षि वशिष्ठ, भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण की गौरक्षा एवं गौ-सेवा की परंपरा रही है। उनका आरोप था कि वर्तमान व्यवस्था में शिक्षा और सामाजिक जीवन से गौमाता के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व को धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है।
—हर विधानसभा क्षेत्र की गौशालाओं का होगा सर्वे
वार्ता में गोसेवाधीश देवेंद्र पाण्डेय 'गोपजी' ने घोषणा की कि उत्तर प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में स्थित सरकारी गौशालाओं की वास्तविक स्थिति का वीडियो दस्तावेज तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन वीडियो के माध्यम से गौशालाओं की स्थिति और सरकारी दावों की सच्चाई जनता के सामने लाई जाएगी।
—छात्र आंदोलन को बताया लोकतंत्र की जीत
इससे पूर्व श्री विद्यामठ में आयोजित बैठक में शंकराचार्य ने शिक्षा, छात्र आंदोलन, गोरक्षा और उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों सहित विभिन्न विषयों पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने हाल के छात्र आंदोलन को युवाओं की लोकतांत्रिक जीत बताते हुए कहा कि संगठित और शांतिपूर्ण संघर्ष के माध्यम से छात्रों ने अपनी आवाज बुलंद की और सरकार को जवाबदेह बनने के लिए विवश किया।
उन्होंने कहा कि दिल्ली से शुरू हुआ छात्र आंदोलन धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गया और छात्रों के संघर्ष के परिणामस्वरूप केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी