श्री संकटमोचन मंदिर के वार्षिक संगीत समारोह में पहली प्रस्तुति ‘रूपवाणी’ संस्था की नृत्य नाटिका
—103वें समारोह में 11 पद्मश्री कलाकारों की होगी खास प्रस्तुतियां,छह दिनों में 135 से अधिक कलाकार हनुमत दरबार में करेंगे संगीत कला का प्रदर्शन
वाराणसी, 06 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में स्थित श्री संकट मोचन मंदिर के छह दिवसीय वार्षिक संगीत समारोह की शुरूआत हनुमत दरबार में सोमवार शाम 7:30 बजे होगी। इसकी पूरी तैयारी हो चुकी है। संगीत रसिक भी मंदिर में जाने माने कलाकारों की प्रस्तुति सुनने और देखने के लिए उत्साहित है। पहले दिन दरबार में रूपवाणी संस्था की प्रस्तुति (नृत्य नाटिका), पं. राहुल शर्मा (संतूर), विधालाल (कथक), एस. आकाश- यद्नेश रायकर (बांसुरी-वायलिन), पद्मश्री मालिनी अवस्थी (गायन), राहुल मिश्रा (तबला सोलो), पं. हरविंदर शर्मा (सितार) सुश्री शिखा भट्टाचार्या (कथक) की प्रस्तुति होगी।
मंदिर के महंत प्रो. विश्वम्भर नाथ मिश्र के अनुसार 103वें संगीत समारोह में छह दिनों तक 135 से अधिक कलाकार लगभग 45 प्रस्तुतियां देंगे। इसमें 11पद्म कलाकार हैं। खास बात यह है कि इस बार 21 नए कलाकारों को भी मंच पर प्रस्तुति का अवसर मिलेगा। 06 दिनों में हनुमत दरबार में पहली बार 14 मुस्लिम कलाकार भी अपने संगीत साधना का प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने बताया कि वर्ष 1923 से प्रतिवर्ष हनुमान जयंती के उपलक्ष्य में संगीत समारोह आयोजित किया जा रहा है। प्रत्येक दिन सांगीत कार्यक्रम सायंकालीन आरती के बाद 7:30 बजे से आरंभ होगा। प्रातः कालीन आरती तक या उसके बाद तक चलता है। मंदिर में दूसरे दिन मंगलवार को ग्रैमी पुरस्कार विजेता पद्मश्री पंडित विश्वमोहन भट्ट की मोहनवीणा, पं. सुनील भट्ट की सात्विक वीणा का वादन होगा। दूसरे दिन ही पं. रामकुमार मिश्र का तबला वादन, उस्ताद गुलाम अब्बास खान का गायन, उस्ताद अकरम खान का तबला वादन होगा।
समारोह में तीसरे दिन पंडित उल्हास कसालकर का गायन, विवेक सुनार का बांसुरी वादन, पद्मश्री जसपिंदर नरूला का गायन, पं. देवाशीष भट्टाचार्य का गिटार वादन, पं. आलोक लाहिड़ी का सरोद वादन का लाेग आनंद ले सकेंगे। दरबार में चौथे दिन पं. यू राजेश का मैंडोलिन वादन और पद्मश्री अनूप जलोटा का गायन होगा। पांचवें दिन पद्मश्री पं. शंभू महाराज के पुत्र व शिष्य पं. राम मोहन महाराज का कथक, पद्मश्री देवेंद्र नारायण मजूमदार का सरोद वादन, पद्मश्री रोनू मजूमदार का बांसुरी वादन और पद्मश्री कंकणा बनर्जी का तथा उस्ताद मसकुर अली खान का गायन व बिलाल खान का तबला वादन होगा। दरबार में छठवें व अन्तिम दिन 11 अप्रैल को पं. रतिकांत महापात्रा और उनकी धर्मपत्नी सुजाता महापात्र ओडिसी नृत्य प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद महताब अली नियाजी का सितार वादन, कलापिनी कोमकली का गायन, सिराज अली खान का सरोद वादन, पंडित अभय रुस्तम सपोरी का शततंत्री वीणा वादन, पंडित अंजू सहाय का तबला वादन की प्रस्तुति देंगे। इसके बाद उस्ताद शाकिर खां (सितार), पं. साजन मिश्र-श्री स्वरांश मिश्र (गायन) की अन्तिम प्रस्तुति होगी।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी