वाराणसी: रथयात्रा मेले के अंतिम दिन श्वेत श्रृंगार में विराजे भगवान जगन्नाथ, रथ स्पर्श के लिए उमड़ा आस्था का सैलाब
— तीन दिवसीय विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा मेले का समापन आज- श्रद्धालुओं ने घर-परिवार और देश-समाज के सर्वमंगल की कामना की
वाराणसी, 18 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी (काशी) के विश्वप्रसिद्ध तीन दिवसीय लक्खा रथयात्रा मेले के अंतिम दिन शनिवार को आस्था अपने चरम पर दिखाई दी। सुबह से ही हजारों श्रद्धालु रथयात्रा मेला क्षेत्र में पहुंचने लगे। भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के दिव्य दर्शन तथा उनके विशाल अष्टकोणीय रथ के स्पर्श के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने चराचर जगत के पालनहार से अपने घर-परिवार, प्रदेश और देश-समाज के सुख, शांति एवं सर्वमंगल की प्रार्थना की।
अंतिम दिन शनिवार को भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र का श्वेत वस्त्र एवं श्वेत पुष्पों से अत्यंत मनोहारी श्रृंगार किया गया। प्रातः पांच बजे मंदिर के पुजारी पं. राधेश्याम पांडेय ने विधि-विधान से श्रृंगार संपन्न कराया। रथ के गर्भगृह में विराजमान काष्ठ विग्रहों के पृष्ठ भाग और पाटन को गुलाब एवं बेला की कलियों से सजाया गया, जबकि रथ के शिखर और छतरी को हरी पत्तियों तथा सफेद पुष्पों से अलंकृत किया गया। इस अलौकिक छटा ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रातः छह से आठ बजे तक भजन मंडली ने भक्तिमय प्रस्तुतियों से वातावरण को कृष्णमय बनाए रखा। इसके बाद सुबह नौ बजे भगवान को छौंका मूंग-चना, पेड़ा, गुड़ तथा खांड़सारी और नींबू से तैयार तुलसी मिश्रित शरबत का भोग अर्पित किया गया। दोपहर में पूड़ी, कटहल की सादी सब्जी, दही, देशी चीनी, सूजी का हलवा, मालपुआ, पंचमेल मिठाई और कटहल के अचार का विशेष भोग अर्पित किया जाएगा।
मध्याह्न 12 बजे भगवान के रथ को परंपरा के अनुसार खींचकर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के समीप तक ले जाया गया। इसके बाद भोग अर्पित कर रथ का पट बंद कर दिया गया। अपराह्न तीन से चार बजे के बीच पुनः श्रृंगार एवं आरती के उपरांत दर्शन-पूजन का क्रम देर रात तक चलता रहेगा। रथयात्रा मेला क्षेत्र में धार्मिक आस्था के साथ उत्सव का उल्लास भी दिखाई दिया। दर्शन-पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने रथयात्रा-महमूरगंज मार्ग पर सजे विभिन्न स्टालों पर जमकर खरीदारी की। बच्चों और महिलाओं ने झूले, चरखी तथा अन्य मनोरंजन साधनों का आनंद लिया, वहीं चाट, गोलगप्पे और अन्य व्यंजनों का भी भरपूर स्वाद लिया।
मेले को सकुशल संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। भेलूपुर के एसीपी, थाना प्रभारी सहित पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी लगातार मेला क्षेत्र का भ्रमण करते रहे। पूरे क्षेत्र की निगरानी सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से भी की जा रही है।
रविवार तड़के प्रभु की होगी विदाई
तीन दिवसीय विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा मेले के समापन के बाद रविवार तड़के तीन बजे भगवान की विशेष आरती होगी। आरती के पश्चात रथ का पट बंद कर प्रभु को भावपूर्ण विदाई दी जाएगी। इसके बाद भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र के विग्रहों को वाहन से अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर ले जाया जाएगा। सोमवार प्रातः मंगला आरती के बाद मंदिर के पट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। वहीं, रथयात्रा मेले की समाप्ति के बाद भगवान के विशाल रथ को खींचकर सिगरा स्थित शहीद उद्यान की रथशाला में सुरक्षित रखा जाएगा, जहां अगले वर्ष की रथयात्रा तक उसका संरक्षण किया जाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी