वाराणसी: विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा मेले में भगवान जगन्नाथ का दर्शन कर श्रद्धालु आह्लादित

 






—दूसरे दिन सफेद और लाल रंग के फूलों से खास श्रृंगार,छौंके मूंग, चना, खांड़सारी नीबू के तुलसीयुक्त शर्बत का चढ़ा भोग

वाराणसी, 17 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी (काशी) में आयोजित 224 वर्ष पुराने विश्वप्रसिद्ध तीन दिवसीय लक्खा रथयात्रा मेले के दूसरे दिन शुक्रवार को आस्था, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। बदली, उमस और बीच-बीच में निकल रही तेज धूप के बावजूद हजारों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के दर्शन के लिए पूरे दिन उमड़ते रहे। सुबह से ही श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ के विशाल अष्टकोणीय रथ की परिक्रमा की और उसके पहियों को स्पर्श कर रथ को प्रतीकात्मक रूप से पांच डग खींचने की परंपरा निभाई।

मान्यता के अनुसार ऐसा करने से परिवार में सुख, समृद्धि और मंगल की प्राप्ति होती है। पूरे मेला परिसर में जय जगन्नाथ और हर-हर महादेव के जयघोष लगातार गूंजते रहे। भोर में पुजारी राधेश्याम पांडेय के नेतृत्व में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मंगला आरती संपन्न हुई। इसके बाद तीनों काष्ठ विग्रहों को लाल वस्त्र धारण कराए गए और सफेद व लाल रंग के पुष्पों से विशेष श्रृंगार किया गया। गुलाब की भीनी सुगंध के बीच भगवान को छौंके हुए मूंग, चना, पेड़ा, गुड़ तथा खांड़सारी, नींबू और तुलसी युक्त शर्बत का भोग अर्पित किया गया।

मंगला आरती के बाद दर्शन-पूजन का सिलसिला आरंभ हुआ, जो देर रात शयन आरती तक जारी रहेगा। श्रद्धालु हाथों में तुलसी की माला और नानखटाई लेकर कतारबद्ध होकर प्रभु के दर्शन करते रहे। इस दौरान भजन मंडलियों ने जगन्नाथ स्वामी की स्तुति में भजन प्रस्तुत कर भक्तिमय वातावरण बना दिया।

दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने मेले में चाट, गोलगप्पे, चाउमीन सहित विभिन्न व्यंजनों का स्वाद लिया और नानखटाई, खिलौने तथा अन्य घरेलू सामानों की खरीदारी की। बच्चों ने गुब्बारों और खिलौनों के साथ झूलों का भी भरपूर आनंद उठाया। मेले में भारी भीड़ के कारण रथयात्रा, सिगरा, कमच्छा और लक्सा क्षेत्र में दिनभर यातायात प्रभावित रहा।

—पूर्व काशी नरेश के वंशज ने किया दर्शन

मेले के दूसरे दिन पूर्व काशी नरेश के वंशज डॉ. अनंत नारायण सिंह अपने पुत्रों के साथ भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने पहुंचे। उन्होंने परंपरा का निर्वहन करते हुए आम श्रद्धालुओं की तरह अष्टकोणीय रथ के पहिए का स्पर्श किया। जगन्नाथ ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत कर प्रभु की माला और प्रसाद भेंट किया।

—भैरव तालाब में भी उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

वाराणसी के ग्रामीण क्षेत्र राजातालाब स्थित भैरव तालाब में आयोजित दो दिवसीय रथयात्रा मेले के अंतिम दिन भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भगवान जगन्नाथ के दर्शन-पूजन के साथ मेले में बच्चों और महिलाओं ने झूले, सर्कस तथा जादूगर के खेल का आनंद लिया। गुब्बारे, खिलौने, मिठाइयों, आम और नानखटाई की दुकानों पर दिनभर खरीदारों की भीड़ बनी रही।

रथयात्रा मेला सुरक्षा समिति के स्वयंसेवकों के साथ राजातालाब, रोहनिया, जंसा, कपसेठी और मिर्जामुराद थानों की पुलिस सुरक्षा व्यवस्था में मुस्तैद रही। फायर ब्रिगेड और पीएसी के जवान भी पूरे मेला परिसर में तैनात रहे। उल्लेखनीय है कि मेले के पहले दिन पूर्व काशी नरेश के वंशज महाराज कुंवर अनंत नारायण सिंह ने राजातालाब स्थित रानी बाजार में भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना कर रथयात्रा का शुभारंभ किया था। इसके बाद श्रद्धालुओं ने रस्सियों के सहारे भगवान के रथ को खींचते हुए राजातालाब, कचनार और ओदर मार्ग से भैरव तालाब स्थित मेला परिसर तक पहुंचाया।---------

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी