बाबा विश्वनाथ के गौने की रस्म की शुरूआत मंगलवार से, माता गौरा के विग्रह पर चढ़ेगा तेल-हल्दी
—नौ गौरी–नौ दुर्गा मंत्रों से अभिमंत्रित हल्दी लगेगी,27 फरवरी को बाबा विश्वनाथ का गौना
वाराणसी, 23 फरवरी (हि.स.)। धर्म नगरी काशी में काशीपुराधिपति बाबा विश्वनाथ के गौने की रस्म की शुरूआत मंगलवार से होगी। महाशिवरात्रि पर काशी में शिव-विवाह की परंपराओं के बाद रंगभरी (अमला) एकादशी पर निकलने वाली बाबा विश्वनाथ की गौना पालकी यात्रा को लेकर तैयारियां चल रही है। बाबा विश्वनाथ के गौने की रस्म टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास “गौरा-सदनिका” में निभाई जाएगी। सोमवार को टेढ़ीनीम स्थित आवास पर महंत पं. वाचस्पति तिवारी ने रंगभरी एकादशी पर होने वाले विविध धार्मिक आयोजनों की जानकारी पत्रकारों को विस्तार से दी।
उन्होंने बताया कि मंगलवार शाम 6:45 बजे माता गौरा की तेल-हल्दी की रस्म अदा की जाएगी। इससे पूर्व काशी के प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर में विशेष अनुष्ठान संपन्न होगा, जहां नौ गौरी और नौ दुर्गा के आह्वान मंत्रों से हल्दी को विधिवत पूजित और अभिमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि गौरा केवल आराध्य देवी नहीं, बल्कि नगर की बेटी हैं। विवाहोपरांत जिस प्रकार घर-परिवार में दुल्हन को गौने से पूर्व हल्दी लगाई जाती है, उसी आत्मीय भाव से माता गौरा को भी यह मंगल-रस्म अर्पित की जाती है। हल्दी अर्पण से पूर्व 11 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा वेद मंत्रों के साथ विशेष पूजन होगा। शंखध्वनि और घंटानाद के बीच मंडप में विराजमान गौरा की चल प्रतिमा को परंपरागत रीति से हल्दी चढ़ाई जाएगी। गौनहारिनों की टोली पारंपरिक मंगलगीत और सोहर प्रस्तुत करेंगी। अगले दिन 25 फरवरी बुधवार को अपरान्ह तीन बजे से बाबा की पारंपरिक पालकी का पूजन किया जाएगा। पालकी की साफ-सफाई, रंग-रोगन और सजावट का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। सायंकाल 6:30 बजे माता गौरा का षोडशी श्रृंगार होगा। पारंपरिक काशी शैली में रेशमी वस्त्र, स्वर्णाभूषण, पुष्पमालाओं और चंदन-रोली से सुसज्जित स्वरूप श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ प्रस्तुत किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि गौना के निमित्त महंत आवास अब गौरा के मायके का रूप ले चुका है। उत्सव में तीसरे दिन 26 फरवरी गुरुवार को सायं 6:30 बजे बाबा का गौना लेने “गौरा-सदनिका” में प्रतीकात्मक रूप से आगमन होगा। यह आयोजन उस लोकभाव को जीवंत करता है, जब वर पक्ष दुल्हन को विदा कराने मायके पहुंचता है। इस अवसर पर बाबा विश्वनाथ की प्रतिमा को पारंपरिक राजसी पोशाक पहनाई जाएगी। इस वर्ष बाबा विशेष ‘देव किरीट’ धारण करेंगे।
—रंगभरी एकादशी पर निकलेगी ऐतिहासिक पालकी यात्रा
महंत के अनुसार अन्तिम दिन 27 फरवरी शुक्रवार को रंगभरी एकादशी का मुख्य आयोजन होगा। ब्रह्म मुहूर्त में बाबा, माता गौरा और प्रथमेश का विशेष पूजन आचार्य सुशील त्रिपाठी के आचार्यत्व में संपन्न होगा। सुबह 7:00 बजे भोग-श्रृंगार के बाद 9:00 बजे से श्रद्धालुओं के लिए दर्शन प्रारंभ हो जाएंगे। दोपहर 12:30 बजे भोग आरती संपन्न होगी। सायंकाल 5:00 बजे बाबा विश्वनाथ की पालकी मंदिर से प्रस्थान करेगी और निर्धारित समयानुसार नगर भ्रमण पर निकलेगी। मार्ग में श्रद्धालु अबीर-गुलाल और पुष्पवर्षा से बाबा और गौरा का स्वागत करेंगे।
—‘शिवांजलि’ से गूंजेगा लोक-संगीत
गौना महोत्सव के अवसर पर टेढ़ीनीम महंत आवास में ‘शिवांजलि’ कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाएगा। पुनीत पागल के संयोजन में लोक एवं सुगम संगीत की प्रस्तुतियां होंगी। काशी की पारंपरिक धुनों पर आधारित भक्ति-गीत आयोजन को सांस्कृतिक ऊंचाई प्रदान करेंगे।
बाबा के पालकी का यात्रा मार्ग
गौरा की पालकी यात्रा 27 फरवरी को सांयकाल विश्वनाथ मंदिर के लिये प्रस्थान करेगी। पालकी टेढ़ीनीम महंत आवास से नवग्रह मंदिर होते हुए विश्वनाथ गली में प्रवेश करेगी। वहां से साक्षी विनायक होते हुए ढुंढिराज गणेश,अन्नपूर्णा मंदिर के सामने से विश्वनाथ मंदिर मे पहुंचेगी विश्वनाथ मंदिर पहुचने पर बाबा की चल प्रतिमा सहीत पालकी गर्भगृह के दक्षिण द्वार से प्रवेश कराकर गर्भगृह में विराजमान कराया जाएगा। पालकी व चल प्रतिमा विश्वनाथ मंदिर में शयन आरती के बाद टेढ़ीनीम महंत आवास वापस आ जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी