भाव विभोर कर गई रामनगर की भोर की आरती,भगवान राम के राज्याभिषेक की लीला देख श्रद्धालु निहाल
वाराणसी,25 अक्टूबर (हि.स.)। चौदह वर्ष बाद महाबली रावण का वध कर लंका जीत अयोध्या लौटे भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक की लीला रविवार तड़के हर किसी के लिए अविस्मरणीय बन गई। लीला की अलौकिक छटा के बीच भोर की आरती की झलक पाने के लिए आस्था का जन समुद्र लीलास्थल पर उमड़ पड़ा। वाराणसी के रामनगर चौराहे से दुर्ग (किला) होते हुए शास्त्री चौक तक कहीं कदम रखने की जगह नहीं बची। आरती के समय मशाल की रोशनी में किले से नंगे पांव पूर्व काशिराज के वंशज डॉ. अनंत नारायण सिंह अयोध्या (प्रतीक रूप से) के लिए निकले तो हर-हर महादेव का जयघोष गूंज उठा। इस दौरान धक्कामुक्की से कई बार असहज स्थिति बनी लेेकिन भगवान के दर्शन की श्रद्धा में आतुर लोग टस से मस नहीं हुए। भीड़ में जहां तक नजर जा रही थी, सिर्फ लोगों के सिर ही सिर दिखाई दे रहे थे। लाल सफेद महताबी रोशनी में भगवान की आरती होने के साथ ही रामनगर का कोना-कोना हर —हर महादेव के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। राम राज्याभिषेक की लीला और विख्यात भोर की आरती के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं ने रतजगा किया। दीवारों, छतों से लेकर बुर्जियों और चबूतरों, मंदिरों में हजारों लोग डेरा डाल दिए। कहीं दादरा, ठुमरी के बोल पर भजन तो कहीं कीर्तन शुरू हो गया। रात ढलने के साथ मेले में भीड़ बढ़ती गई। रात भर लोग सड़कों पर भोर की आरती के नयनाभिराम क्षणों का बेसब्री से इंतजार करते रहे। नंदीग्राम मंदिर पर रामायणी मानस पाठ का आनंद ले रहे थे। शास्त्री चौक के पास मंदिर परिसर में भजन गायन का अलग रस था। भोर की आरती का समय नजदीक आने के साथ ही अयोध्या मैदान श्रद्धालुओं की भीड़ से ठसाठस भर गया।
—किले के द्वार पर डंका बजा
पूरब में अरुणोदय की लाली प्रस्फुटित होने वाली थी कि रामनगर किले के द्वार पर डंका बजने लगा। मशालची मशाल लेकर चल पड़े। उनके पीछे डॉ अनंत नारायण सिंह नंगे पांव आरती स्थल के लिए सड़क के दोनों किनारों पर खड़ी कतारबद्ध भीड़ का अभिवादन करते निकले। भीड़ के बीच से सुरक्षा घेरे में उनको अयोध्या के मैदान पहुंचाया गया। पूर्व काशिराज के वंशज के अयोध्या पहुंचने के बाद महताबी रोशनी में राम दरबार की आरती हुई।
—अयोध्या से पंचवटी निकले काशिराज
भोर की आरती देखने के लिए अयोध्या (रामनगर) जाने वाली सड़कें, गलियां और घरों की छतें श्रद्धालुओं से पटी हुई थीं। आरती के बाद डॉ अनंत नारायण सिंह अपनी कार से पंचवटी की ओर रवाना हो गए। उधर, राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, सीता समेत पांचों स्वरूपों को सेवकों ने अपने कंधों पर बैठा कर गंगा दर्शन कराया। इसके बाद भगवान के स्वरूप बलुआघाट स्थित धर्मशाला में ले जाए गए।
दूरियां घटने से बढ़ा आस्था का कारवां
सामने घाट पुल निर्माण के बाद भोर की आरती में बेतहाशा भीड़ उमड़ी। अब तक नाव की सवारी या किसी दूसरे साधनों से राजघाट पुल या फिर विश्व सुंदरी पुल की परिक्रमा कर रामनगर पहुंचने वाले इस बार चंद मिनटों में गंगा पार हुए। नतीजा यह हुआ कि रात 12 बजे के बाद ही रामनगर में न तो दो पहिया वाहन खड़े करने की जगह मिली न तो कहीं बैठने की ठांव। विश्व प्रसिद्ध रामलीला में शनिवार की शाम से रविवार की भोर तक श्रद्धालु श्रद्धा की डोर से बंधे रहे। प्रभु श्रीराम राज्याभिषेक की दिव्य झांकी का पूरी रात दर्शन का सौभाग्य पाया और भोर की आरती की निराली छटा से लीला स्थल का कोना-कोना विभोर नजर आया। लाल और श्वेत महताबी की रोशनी में दिव्य अलौकिक दृश्यावली और हाथ से हाथ जोड़े लीलाप्रेमियों ने सीताराम जय सीताराम के जप के बीच भक्ति गंगा में गोता लगाया। बताते चले रामनगर की विश्वप्रसिद्ध लीला में आरती तो नित्य होती है लेकिन श्रीराम राज्याभिषेक के बाद भोर में होने वाली आरती सर्वाधिक पुण्यदायी और महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके लिए रात्रिपर्यत लीला प्रेमी अयोध्या मैदान में डटे रहते है। रात के तीसरे प्रहर से तो मानो रेला ही उमड़ पड़ता है। स्थिति यह होती है कि श्रद्धा के आगे विशाल मैदान कम पड़ जाता हैं। परंपरानुसार महाराजा अनंत नारायण सिंह दुर्ग से पैदल लीला स्थल पहुंचते है। आसमान में सूर्य की लाली छाने के साथ अयोध्या के राज सिंहासन पर विराजमान प्रभु श्रीराम-सीता समेत चारों भाईयों व हनुमानजी की माता कौशल्या आरती उतारती हैं। इसके साथ ही पूरा क्षेत्र प्रभु की जयकार से गूंज उठता हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी