प्रोफेसर रमाकांत पांडेय का कुल​पति बनना संसंविवि के लिए गौरव का पल

 


संस्कृत जन भाषा बने यही प्रयास होगा : प्रो. रमाकांत पांडेय

वाराणसी, 20 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र प्रो.रमाकांत पाण्डेय के उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुल​पति बनने पर शुभचिंतकों ने बधाई दी और इसे गौरव का पल बताया। इसके पहले प्रो. पाण्डेय केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर के निदेशक रहे।

प्रो.पांडेय के कुलपति बनने पर सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा व अन्य आचार्यों प्रो. रामपूजन पांडेय, प्रो. जितेन्द्र कुमार, प्रो.रजनीश कुमार शुक्ल, प्रो.सुधाकर मिश्र, प्रो.शैलेश कुमार मिश्र, प्रो.राजनाथ, प्रो.दिनेश कुमार गर्ग, प्रो.अमित कुमार शुक्ल ने बधाई दी और इसे विश्वविद्यालय के लिए गौरव का पल बताया।

प्रोफेसर पांडेय ने कहा कि संस्कृत हमारी मां है, यह केवल भाषा ही नहीं बल्कि भारत की आत्मा है। भारतीय ज्ञान परम्परा का संरक्षण, संवर्धन इसी भाषा के माध्यम से हो रहा है। मेरा प्रयास होगा कि यह जन भाषा बने, जिससे जीवन में अनुशासन, सद्भाव और मानवता का भाव और प्रभावकारी होगा

उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर के निदेशक प्रो. रमाकांत पांडेय को उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार का कुलपति नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति उत्तराखंड के राज्यपाल एवं कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह द्वारा 3 वर्षों के लिए की गई है। मंगलवार को यह जानकारी विश्वविद्यालय के जनसम्पर्क अधिकारी ने दी।

सम्पूर्णांनन्द संस्कृत वि​श्वविद्यालय के जनसम्पर्क अधिकारी ने बताया कि संस्कृत विद्वान और शिक्षाविद् प्रो.रमाकांत पांडेय को 31 वर्षों का अध्यापन अनुभव है, जिसमें 14 वर्षों से अधिक समय प्रोफेसर के रूप में सेवाएं देने का है। इसके साथ ही केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में संस्कृत प्रोफेसर के रूप में नियुक्त होकर, निदेशक के पद पर रहने के दौरान कुलपति नियुक्त हुए हैं। वे संस्कृत साहित्य, व्याकरण और संस्कृति पर शोध कार्य कर रहे हैं। उनके प्रकाशनों में 65 पुस्तकें, 150 शोधपत्र, और 22 साहित्यिक लेख शामिल हैं। वे विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में विषय विशेषज्ञ के रूप में भाग लेते हैं और 57 से अधिक कार्यशालाओं का आयोजन कर चुके हैं। उन्हें 14 राज्य स्तरीय एवं राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी