2023 के महिला आरक्षण कानून काे लागू करे सरकार :अजय राय
वाराणसी,22 अप्रैल (हि.स.)। नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी सियासत उबलने लगी है। एक ओर जहां भारतीय जनता पार्टी की महिला मोर्चा ने लोकसभा में बिल पास न होने पर कांग्रेस,समाजवादी पार्टी सहित अन्य विपक्षी दलों के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल लिया है। वहीं,कांग्रेस भी पत्रकार वार्ता और अन्य कार्यक्रमों के जरिए केन्द्र की भाजपा गठबंधन सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सीधे कठघरे में खड़ा करने के लिए सियासी सवाल दाग रही है। बुधवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने अपने लहुराबीर स्थित आवासीय कार्यालय पर अपनी पत्नी रीना राय के साथ केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर व्यापक सवाल उठाए। वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक सितंबर 2023 में संसद से पारित हो गया। राष्ट्रपति की मंजूरी भी प्राप्त हो गई। लेकिन आज तक लागू नहीं किया गया। अगर यह ऐतिहासिक कानून था, तो इसे लागू करने में ढाई साल क्यों लग गए?।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को अधिकार देने का वादा किया गया, लेकिन उन्हें केवल इंतजार और भ्रम मिला। अजय राय ने आरोप लगाया कि 2026 में महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना एक सोची-समझी चाल है। यह साफ संकेत है कि सरकार महिलाओं को उनका अधिकार तुरंत नहीं देना चाहती। यह नारी सम्मान नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रबंधन है।” उन्होंने कांग्रेस का पक्ष रखते हुए कहा कि वर्ष 2010 में कांग्रेस सरकार ने महिला आरक्षण को आगे बढ़ाया। 2023 में भी कांग्रेस ने संसद में इसका समर्थन किया। आज भी कांग्रेस की मांग—बिना शर्त तत्काल इसे लागू करने की है। कांग्रेस ने कभी महिला आरक्षण का विरोध नहीं किया, हमने सिर्फ इसे टालने की राजनीति का विरोध किया है। अजय राय ने महिला आरक्षण के भीतर सामाजिक न्याय का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एससी और एसटी के लिए प्रावधान हैं, लेकिन ओबीसी महिलाओं के लिए स्पष्ट व्यवस्था क्यों नहीं है।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी