वाराणसी : प्रख्यात साहित्यकार जयशंकर प्रसाद के ऐतिहासिक नाटक ‘ध्रुवस्वामिनी’ का होगा मंचन

 


वाराणसी, 12 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भारतेन्दु नाट्य अकादमी, संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश शासन, श्री नागरी नाटक मंडली न्यास एवं वाराणसी जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में प्रख्यात साहित्यकार जयशंकर प्रसाद के ऐतिहासिक नाटक ‘ध्रुवस्वामिनी’ का सोमवार शाम को मंचन होगा। कबीरचौरा स्थित श्री नागरी नाटक मंडली, प्रेक्षागृह में शाम 06 बजे से नाट्य की प्रस्तुति रंगकर्मी प्रियंका शर्मा के निर्देशन में होगी।

प्रियंका शर्मा के अनुसार, यह नाट्य प्रस्तुति भारतीय इतिहास, सांस्कृतिक चेतना, नारी स्वाभिमान एवं राष्ट्रबोध जैसे महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करेगी। इस आयोजन का उद्देश्य प्रदेश की समृद्ध नाट्य परंपरा एवं ऐतिहासिक-सांस्कृतिक विरासत को जनसामान्य तक पहुँचाना तथा रंगमंच के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने ऐतिहासिक नाटक देखने के लिए जनपद के जनप्रतिनिधियों, विशिष्ट नागरिकों, साहित्यकारों, कला एवं संस्कृति प्रेमियों को सायं 06:00 बजे प्रेक्षागृह में आने की अपील भी की।

बताते चले ध्रुवस्वामिनी राष्ट्रकवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक और समस्या-प्रधान नाटक है। इसका प्रकाशन 1933 ईस्वी में हुआ था और यह जयशंकर प्रसाद का अंतिम व सबसे श्रेष्ठ नाट्य-कृति माना जाता है। नाटक में गुप्त काल (समुद्रगुप्त के बाद की स्थिति)ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है। इस नाटक के मुख्य पात्रों में ध्रुवस्वामिनी (नाट्य-कृति की नायिका और आत्मविश्वासी वीरांगना),रामगुप्त (कायर, व्यभिचारी और अयोग्य राजा)चंद्रगुप्त (वीर, पराक्रमी और ध्रुवस्वामिनी के प्रेमी), शिखरस्वामी (रामगुप्त का चालाक महामंत्री),शकराज (शक क्षत्रप / राजा), कोमा (शकराज से प्रेम करने वाली एक पात्र) मंदाकिनी (चंद्रगुप्त की बहन / ध्रुवस्वामिनी की हितैषी) है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी