वाराणसी: शहर में बरसों पुराने जलजमाव के दर्जनों प्वाइंट्स अब होंगे खत्म
-नगर निगम के प्रभावी प्रबंधन से मिलेगी राहत, विशेषज्ञों की सलाह से बन रहा स्थायी ड्रेनेज प्लान
-2000 करोड़ से बदलेगी 22 वार्डों की सीवर लाइन, 200 से अधिक प्वाइंट्स हो रहे अपग्रेड
वाराणसी,10 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में भारी बारिश के चलते इस वर्ष शहर में जलभराव की स्थिति को देख वाराणसी नगर निगम इसके स्थायी समाधान के लिए जुट गया है। तेलियाबाग, अंधरापुल अंडरपास, भदउ चुंगी, मलदहिया चौराहा, जीजीआईसी स्कूल के सामने की सड़क, लहुराबीर, गोदौलिया, सिगरा, महमूरगंज, गुरुबाग और रथयात्रा जैसे प्रमुख इलाकों में अब तस्वीर बदलने की तैयारी है। नगर निगम की ओर से समय रहते बनाई गई विशेष कार्ययोजना और नालों व सीवर की तली झाड़ सफाई का नतीजा है कि इस बार इन सभी संवेदनशील प्वाइंट्स से जलजमाव पूरी तरह खत्म हो चुका है। जिन सड़कों पर पहले हल्की सी बरसात में नावें चलाने जैसी नौबत आ जाती थी, वहां से अब बारिश थमते ही पानी तेजी से निकल जा रहा है और लोगों को जलभराव से मुक्ति मिल गई है।
नगर निगम के जनसम्पर्क कार्यालय के अनुसार,महापौर अशोक कुमार तिवारी के नेतृत्व में नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल और निगम के वरिष्ठ अधिकारी खुद प्रतिदिन फील्ड में डटकर निचले इलाकों का निरीक्षण कर रहे हैं। जहां कहीं भी ढलान या तकनीकी खराबी के कारण पानी के रुकने की आशंका होती है, वहां तत्काल पंप लगाकर पानी की निकासी कराई जा रही है। इस दौरान बरसाती पानी के साथ बहकर आने वाला कचरा और प्लास्टिक यानी फ्लोटिंग मैटेरियल सीवर और नालों के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है। फ्लोटिंग मैटेरियल के कारण गलीपिट और नाले जाम न हों, इसके लिए विशेष सफाई कर्मियों की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और जालियों व नालों के मुहाने से कचरा हटा रही हैं, ताकि पानी का बहाव बिना किसी रुकावट के लगातार बना रहे।
शहर की जल निकासी और सीवरेज व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से मजबूत करने के लिए निगम बड़े पैमाने पर ढांचागत सुधार कर रहा है। शहर भर में 200 से अधिक पुराने और जर्जर सीवरेज सिस्टम को दुरुस्त करने का काम तेजी से गतिमान है। इसके साथ ही वाराणसी के 22 पुराने वार्डों में करीब दो हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से दशकों पुरानी सीवर और पेयजल पाइप लाइनों को पूरी तरह बदलने का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है। इस कदम से आने वाले वर्षों में पुराने शहर की ड्रेनेज क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। वर्तमान में निगम इस वर्ष हो रही बरसात के पैटर्न और जलजमाव वाले क्षेत्रों का सूक्ष्म अध्ययन भी करा रहा है। इसके तहत तकनीकी विशेषज्ञों के परामर्श से जलभराव की समस्या का पूरी तरह स्थायी समाधान तलाशने की राह पर काम किया जा रहा है, ताकि आने वाले समय में काशी को जलजमाव मुक्त शहर बनाया जा सके।
काशी के भौगोलिक विस्तार के साथ ही नगर निगम की जिम्मेदारियां और चुनौतियां भी काफी बढ़ गई हैं। नव-विस्तारित क्षेत्र में 84 नए गांवों के साथ-साथ रामनगर और सूजाबाद के शामिल होने के बाद अब नगर निगम का कुल क्षेत्रफल 84 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 186 वर्ग किलोमीटर हो चुका है। इसके अतिरिक्त काशी में प्रतिदिन आने वाली तीन से चार लाख की फ्लोटिंग जनसंख्या (पर्यटकों व श्रद्धालुओं) का भी नागरिक सुविधाओं पर भारी दबाव रहता है। नए शामिल हुए कई विस्तारित क्षेत्रों में अभी सुव्यवस्थित सीवर और नालों का नेटवर्क मौजूद नहीं है और जहां बना भी है, वहां सुनियोजित सिस्टम का अभाव है। इसके बावजूद निगम प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और इन नए क्षेत्रों में जलनिकासी, सीवर लाइन और शुद्ध पेयजल की पाइप लाइनों का नया जाल बिछाने का मास्टर प्लान बनाकर काम शुरू कर रहा है, जिससे नए शहरी इलाकों में भी ड्रेनेज की स्थायी सुविधा विकसित की जा सके।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी