12वीं मोहर्रम पर शिया मुसलमानों ने मनाया इमाम हुसैन का तीजा, शहर भर से उठे जुलूस

 

या हुसैन की सदाओं से गूंजा बनारस, सुबह इमाम के फूल की मजलिसें

वाराणसी, 28 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में 12वीं मोहर्रम पर रविवार को शिया मुसलमानों ने इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों का तीजा अक़ीदत और एहतराम के साथ मनाया। शिया बहुल इलाकों में परम्परागत रूप से या हुसैन की सदाएं सुबह से शाम तक हर तरफ़ गूंजती रहीं। लाखों की तादाद में अज़ादारों ने जुलूसों और मजलिसों में शिरकत कर अपने मौला को खिराजे-अक़ीदत पेश किया। हज़रत अली समिति के सदस्य सलमान हैदर ने बताया कि तीजा दरअसल किसी के इंतक़ाल के तीसरे दिन का सोयम होता है, और इसी रवायत के तहत बारहवीं मोहर्रम को इमाम हुसैन व उनके जाँनिसार साथियों का तीजा किया जाता है।

—सुबह इमाम के फूल की मजलिसें, इमामबाड़े किए गए ठंडे

सलमान हैदर ने बताया कि तीजे के दिन सुबह से ही शहर भर के इमामबाड़ों में फ़ातिहा का सिलसिला शुरू हो गया और इमाम के फूल की पुरदर्द मजलिसें मुनअक़िद हुईं। इन मजलिसों के बाद बहुत से इमामबाड़े ठंडे किए गए, यानी पूरे महीने सजे रहे अज़ाख़ानों की अज़ादारी का इख़्तिताम हुआ। मजलिसों में सुरमे, पान और दीगर सामान पर फ़ातिहा दी गई और इमाम की नज़्र का शर्बत व मलीदा अज़ादारों में तक़सीम किया गया।

—दोपहर बाद उठे अलम व अखाड़े के जुलूस

दोपहर बाद कड़ी धूप और उमस के बीच शहर के बजरडीहा, चौक, मदनपुरा, शिवाला, लल्लापुरा, अर्दली बाज़ार, दोशीपुरा और अलईपुरा समेत कई इलाक़ों से आलम व अखाड़े के जुलूस उठाए गए, जो अपने कदीमी रास्तों से होते हुए लल्लापुरा स्थित दरगाहे फातमान और सदर इमामबाड़ा (लाट सरैया) की ओर बढ़े। अंजुमन ज़ाद-ए-आख़िरत का जुलूस मदनपुरा से अपने पारंपरिक रास्तों से होता हुआ फातमान पहुँचा। इन जुलूसों में नौजवानों ने लाठी-डंडे के हैरतअंगेज़ करतब दिखाते हुए इल्म-ए-सिपहगिरी और जंगी फ़न का मुज़ाहिरा किया, जिसे बनारस में पटा या बनेठी कहा जाता है। जुलूसों के साथ इमाम के तीजे का सामान भी रहा, जिसमें शर्बत और मलीदा इमाम की नज़्र कर अज़ादारों में बाँटा गया।

—इंसानियत के नाम इमाम का पैग़ाम

सलमान हैदर ने बताया कि इमाम हुसैन ने पूरी इंसानियत की बक़ा और हक़ की हिफ़ाज़त के लिए अपनी और अपने अज़ीज़ों की क़ुर्बानी दी। यही वजह है कि आज मज़हब और सरहदों से ऊपर उठकर सारी इंसानियत उन्हें अपने दिल में जगह दिए हुए है। तीजे के इन जुलूसों और मजलिसों में भी बनारस की गंगा-जमुनी तहज़ीब की झलक साफ़ नज़र आई, जहाँ हर मज़हब के लोगों ने जुलूसों का इस्तक़बाल कर इमाम हुसैन को खिराजे-अक़ीदत पेश की।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी