चौथी मोहर्रम : वाराणसी शहर में अकीदत के साथ निकले तीन मातमी जुलूस
—मजलिसों में याद किए गए हबीब इब्ने मज़ाहिर,दोस्ती की मिसाल का ज़िक्र
वाराणसी, 20 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में चौथी मोहर्रम के अवसर पर शनिवार को शहर के शिया बहुल इलाकों में 'या हुसैन' की सदाएं गुंजायमान रही। इस दौरान विभिन्न इमामबाड़ों और अज़ाखानों में आयोजित मजलिसों में इमाम हुसैन के वफ़ादार दोस्त हबीब इब्ने मज़ाहिर की शहादत और उनकी अदम्य निष्ठा को याद किया गया। कालीमहल में आयोजित एक मजलिस को ख़िताब करते हुए हज़रत अली समिति के सदस्य सलमान हैदर ने बताया कि कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन ने अपने इस 80 वर्षीय परम मित्र को ख़त लिखकर कूफ़े से विशेष तौर पर बुलाया था। उन्होंने बताया कि इमाम हुसैन और हबीब इब्ने मज़ाहिर की यह ऐतिहासिक दोस्ती आज भी पूरी दुनिया के लिए एक मील का पत्थर है।
—चौथी मोहर्रम पर निकले जुलूस और इतिहास
चौथी मोहर्रम पर पहला जुलूस (चौहट्टा लाल ख़ान) से अपरान्ह 2 बजे इम्तियाज़ हुसैन नक़वी के चौहट्टा लाल ख़ान स्थित निवास (इमामबाड़े) से निकला। इसमें अलम और ताबूत का उठाया गया। यह पारंपरिक कदीमी जुलूस अपने पुराने रास्तों से होता हुआ चौहट्टा लाल ख़ान स्थित मस्जिद और इमामबाड़े पर पहुँचकर संपन्न हुआ। इस जुलूस की अगुवाई अंजुमन आबिदिया ने की, जहाँ अज़ादारों ने भारी मातम किया। इसी तरह दूसरा जुलूस शिवाला के मोहल्ला करमटीला से सैयद आलिम हुसैन रिज़वी के संयोजन में निकला। यह मातमी जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होते हुए गौरीगंज पहुँचा, जहाँ वरिष्ठ पत्रकार काज़िम रिज़वी के इमामबाड़े पर जाकर इसका समापन हुआ।
इसी क्रम में तीसरा व अंतिम जुलूस चौहट्टा लाल ख़ान मस्जिद से निकला। इसमें अलम, दुलदुल और ताबूत का उठाया गया। यह जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ सदर इमामबाड़े पहुँचकर समाप्त हुआ। इस जुलूस में अंजुमन आबिदिया, अंजुमन सज्जादिया और अंजुमन हाशिमिया के नौजवानों ने पूरे रास्ते पुरदर्द नौहाख़्वानी की और सीनाज़नी का मातम कर शहीदाने-कर्बला को खिराजे-अक़ीदत पेश किया। चौथी मोहर्रम पर शहर के विभिन्न स्थानों पर आयोजित मजलिसों को मौलाना बाक़र बलियावी, डॉ. शफ़ीक़ हैदर और मंज़र नक़वी जैसे उलेमाओं ने ख़िताब किया।
पाचवीं मोहर्रम के प्रमुख जुलूस
हज़रत अली समिति के सदस्य सलमान हैदर ने बताया कि जैसे-जैसे तारीखें आगे बढ़ रही हैं, अज़ादारी का सिलसिला और मजलिसों की तादाद बढ़ती जा रही है। इसी क्रम में रविवार को 5वीं मोहर्रम को प्रमुख कदीमी जुलूस उठाए जाएंगे। इसमें वक्फ मस्जिद व इमामबाड़ा मौलाना मीर इमाम अली, छत्तातला से अलम का कदीमी जुलूस अंजुमन हैदरी के ज़ेरे-इंतज़ाम उठाया जाएगा। यहाँ मरहूम वज्जन ख़ान के परिवार के सदस्य पारंपरिक मर्सिया (सवारी) पढ़ेंगे और भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान साहब के परिजन शहनाई पर मातमी धुन पेश करेंगे।
इसी तरह अर्दली बाज़ार में हाजी अबुल हसन के निवास से इमाम हुसैन के 06 महीने के मासूम शहजादे हज़रत अली असगर का झूला निकाला जाएगा, जिसमें अंजुमन इमामिया नौहा और मातम करेगी। पाँचवीं मोहर्रम को ही रामनगर से महाराजा बनारस द्वारा स्थापित किया गया ऐतिहासिक मन्नत का जुलूस उठाया जाएगा, जिसमें अहले-सुन्नत (सुन्नी समुदाय) के हज़रात भी पूरी अक़ीदत के साथ शामिल होते हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी