हम ट्रांस जेंडर जीवन की चुनौतियों से जितना परिचित होंगे, उतना उनके प्रति हमारी सामाजिक सोच समृद्ध होगी : प्रो. अनुराग कुमार
—ट्रांसजेंडर सेल महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कार्यशाला में ट्रांसजेंडर समुदायों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा
वाराणसी, 17 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ट्रांसजेंडर सेल महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ एवं प्रिज्मैटिक फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को पहचानों के साथी पहल के अंतर्गत मीडिया पेशेवरों के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य पत्रकारों, संपादकों, कंटेंट क्रिएटर्स एवं अन्य मीडिया कर्मियों का एक सहयोगी नेटवर्क तैयार करना है, जो ट्रांसजेंडर समुदायों से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशील, सम्मानजनक और समावेशी रिपोर्टिंग को बढ़ावा दे सके।
समन्वयक ट्रांसजेंडर सेल प्रोफेसर संजय ने कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में बताया कि महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ का ट्रांसजेंडर सेल प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल की प्रेरणा एवं कुलपति आनंद कुमार त्यागी के निर्देशन में जुलाई 2023 से कार्यरत है।
सेल को ट्रांसजेंडर एवं क्वीयर एवं अन्य यौनिक पहचान रखने वाले विद्यार्थी को उच्च शिक्षा की और प्रेरित करना और उन्हें गरिमा युक्त करियर का चुनाव करने एवं उनके खिलाफ होने वाली हिंसा और भेदभाव को समाप्त कर एक समावेशी माहौल तैयार करने के लिए स्थापित किया गया है। यह सेल निरंतर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यालय परिसर एवं वाराणसी ज़िले में ट्रांसजेंडर लोगों के प्रति लोगों को जागरूक करने का अभियान चला रहे हैं।
प्रो. अनुराग कुमार ने कहा हम ट्रांस जेंडर जीवन की चुनौतियों से जितना परिचित होंगे उतना उनके प्रति हमारी सामाजिक सोच समृद्ध होगी। उनकी चुनौती घर से शुरू होकर समाज तक विस्तार पाती है। इस दुरूह जीवन में अस्मिता की तलाश और कैरियर का निर्माण निरंतर जटिल से जटिलतम प्रक्रिया का स्वरूप धारण करता है। इस समूह पर बनी बनाई धारणाओं को तोड़े बिना संवाद का उचित प्रतिफल प्राप्त नहीं हो सकता।
कार्यशाला में फाउंडेशन की नीति ने बताया कि मीडिया समाज में जनमत निर्माण और सामाजिक दृष्टिकोणों को प्रभावित करने की महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ट्रांसजेंडर एवं क्वीयर समुदायों के जीवन-अनुभवों, चुनौतियों और उपलब्धियों को सही संदर्भ और सम्मान के साथ प्रस्तुत करना समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसी उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यशाला में प्रतिभागियों को ट्रांसजेंडर एवं क्वीयर समुदाय की विविध पहचानों, जेंडर और लैंगिकता की बुनियादी समझ, समावेशी भाषा के प्रयोग, नैतिक रिपोर्टिंग और समुदायों के प्रतिनिधित्व से जुड़े विषयों पर जानकारी प्रदान की गयी। सहभागितापूर्ण गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को यह समझने का माहौल बना कि समाचारों, तस्वीरों और सार्वजनिक विमर्श में समुदायों का प्रतिनिधित्व किस प्रकार अधिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया जा सकता है। कार्यक्रम का संचालन रूमान और अतिथियों का स्वागत अनामिका ने किया।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी