मणिकर्णिका घाट पर केवल सौंदर्यीकरण व पुनर्निर्माण कार्य, सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे निराधार दावे: जिलाधिकारी
—मोक्षतीर्थ के पुनर्निमाण कार्य को लेकर जिला प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की
वाराणसी, 16 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी काशी के मोक्षतीर्थ मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्निर्माण एवं सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर सोशल मीडिया पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद विवाद ने वाराणसी से लेकर इंदौर तक तूल पकड़ लिया।
इस बीच शुक्रवार को वाराणसी जिला प्रशासन, भाजपा के वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि एवं महापौर ने मणिकर्णिका घाट का स्थलीय निरीक्षण किया। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि घाट पर किसी भी मंदिर या मूर्ति को क्षति नहीं पहुंचाई गई है और चल रहे विकास कार्य को पंडा समाज, स्थानीय नागरिकों व व्यापारियों का समर्थन प्राप्त है।
जिला प्रशासन के जारी बयान में कहा गया कि मणिकर्णिका घाट के साथ-साथ महाश्मशान हरिश्चंद्र घाट का भी जीर्णोद्धार किया जा रहा है। पौराणिक मंदिरों का समुचित संरक्षण करते हुए अंतिम संस्कार के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुव्यवस्था को ध्यान में रखकर यह कार्य किया जा रहा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि परियोजना के अंतर्गत घाट पर प्लेटफॉर्म का निर्माण, शवदाह स्थल का विकास, लकड़ी भंडारण स्थल, पूजा सामग्री स्टोर, मुंडन स्थल सहित आवश्यक आधारभूत सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसके अलावा घाट की मढ़ी (सीढ़ियों) का भी पुनर्निर्माण प्रस्तावित है, जिसमें जनसहयोग की अपेक्षा की गई है।
वाराणसी दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं प्रदेश के पूर्व मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि मणिकर्णिका घाट पर किसी भी मंदिर या मूर्ति की तोड़फोड़ नहीं हुई है। विपक्ष द्वारा एआई से तैयार किए गए वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल कर भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मणिकर्णिका घाट के साथ हरिश्चंद्र घाट का भी योजनाबद्ध ढंग से नवीनीकरण किया जा रहा है, जिससे भविष्य में शौचालय, चेंजिंग रूम जैसी सुविधाएं आमजन को उपलब्ध होंगी।
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार के अनुसार वाराणसी स्थित मणिकर्णिका घाट पर पौराणिक काल से बड़ी संख्या में लोग अंतिम संस्कार के लिए आते रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए वर्तमान में घाट का पुनर्निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य प्रगति पर है। इसके अंतर्गत पुराने घाट की सीढ़ियों तथा कच्चे हिस्से पर सौन्दर्यीकरण कार्य किया जा रहा है। घाट पर स्थित सभी मंदिरों को पूर्ण रूप से संरक्षित किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुनर्निर्माण क्षेत्र में एक मढ़ी तथा दीवारों पर स्थित कुछ कलाकृतियां भी थीं, जो कार्य के दौरान प्रभावित हुई हैं। इसे लेकर सोशल मीडिया पर कुछ भ्रामक एवं निराधार दावे प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। तथ्य यह है कि घाट पर मौजूद सभी कलाकृतियों एवं मूर्तियों को संस्कृति विभाग द्वारा विधिवत संरक्षित कर सुरक्षित स्थान पर रखा गया है तथा पुनर्निर्माण कार्य के पश्चात इन्हें पूर्ववत स्वरूप में पुनः स्थापित किया जाएगा। जन सामान्य से आग्रह है कि भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही विश्वास करें।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी