वाराणसी : मोहर्रम का चाँद दिखा, पहली मोहर्रम 17 जून से
—चाँद दिखने के साथ ही मजलिसों और जुलूसों की तैयारियां शुरू
वाराणसी, 16 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में मोहर्रम का महीना 17 जून से शुरू होगा। मंगलवार की शाम मोहर्रम का चाँद दिखने के बाद यह निर्णय लिया गया। अली समिति के सदस्य सलमान हैदर ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि हिजरी सन 1448 का यह पहला महीना शिया मुसलमानों के लिए भारी गम का होता है। इसी महीने की 10 तारीख को पैगम्बर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों को इराक के कर्बला शहर में तीन दिन भूखा-प्यासा रख शहीद कर दिया गया था। इन शहीदों में उनका 06 महीने का मासूम बच्चा भी शामिल था। सलमान हैदर ने बताया कि मोहर्रम का चाँद दिखने के साथ ही बनारस के दालमंडी, मदनपुरा, बजरडीहा, दोषीपुरा, प्रहलाद घाट और सरैया जैसे इलाकों में मजलिसों और जुलूसों की तैयारियां शुरू हो गई हैं। पूरे अदब और अकीदत के साथ सारे जुलूस निकाले जाएंगे। शहर में 1 से 12 मोहर्रम तक करीब 60 से ज्यादा जुलूस उठेंगे। इस बार इमाम हुसैन की शहादत का दिन (आशुरा) 26 जून को मनाया जाएगा।
——प्रमुख जुलूसों की तारीखें
17 जून (पहली मोहर्रम): सुबह 7 बजे से मजलिसें शुरू होंगी। दोपहर 3 बजे लाट सरैया इमामबाड़े में अलम और दुलदुल का जुलूस निकलेगा।
18 जून (दूसरी मोहर्रम): शिवपुर में रात 8 बजे जुलूस उठेगा। दोपहर 2 बजे उस्ताद बिस्मिल्लाह खाँ के घर पर कदीमी मजलिस होगी।
19 जून (तीसरी मोहर्रम): सायं 5 बजे औसानगंज नवाब की ड्योढ़ी से और शिवाला से अलम का जुलूस निकलेगा।
20 जून (चौथी मोहर्रम): चौहट्टा लाल खाँ इमामबाड़ा से रात 8 बजे अलम व दुलदुल का जुलूस निकलेगा।
21 जून (पांचवीं मोहर्रम): गोविंदपुरा से अलम का जुलूस उठेगा, जिसमें उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के परिजन शहनाई पर मातमी धुन बजाएंगे।
22 जून (छठवीं मोहर्रम): विश्व प्रसिद्ध 40 घंटे का दुलदुल जुलूस कच्ची सराय (दालमंडी) से शाम 5 बजे उठेगा, जो शहर के अलग-अलग रास्तों से होते हुए 24 जून (8 मोहर्रम) की सुबह वापस आएगा।
24 जून (आठवीं मोहर्रम): चहमामा इमामबाड़े से रात 8:30 बजे अलम व तुर्बत का जुलूस निकलेगा।
25 जून (नवीं मोहर्रम): इमाम चौकों पर ताजिये रखे जाएंगे। रात में शिवाला से प्रसिद्ध दूल्हा का जुलूस निकलेगा और भोर में फातमान में अंगारों पर मातम होगा।
26 जून (दसवीं मोहर्रम - आशुरा): सुबह से शाम तक जंजीर और कमा का मातम करते हुए 26 अंजुमनों के जुलूस निकलेंगे जो लाट सरैया और फातमान जाकर खत्म होंगे। शाम को 'शामे गरीबां' की मजलिस होगी।
27 जून (ग्यारहवीं मोहर्रम): दिन में 11 बजे 'चुप का डंका' यानी लुटे हुए काफिले का जुलूस निकलेगा।
28 जून (बारहवीं मोहर्रम - तीजा): दोपहर बाद आलम और अखाड़े का जुलूस निकलेगा।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी