राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस पर वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम के गंगा द्वार पर लहराया तिरंगा
—धाम में गूंजे देशभक्ति के स्वर, तिरंगे के सम्मान में आयोजित हुआ विशेष कार्यक्रम
वाराणसी, 22 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस पर बुधवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम के गंगा द्वार पर देशभक्ति और राष्ट्रगौरव का माहौल देखने को मिला। विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा के गगनभेदी उद्घोष के बीच राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा पूरे सम्मान के साथ लहराया गया। बाबा विश्वनाथ धाम और मां गंगा के पावन तट पर देशभक्ति के गीतों और नारों से वातावरण राष्ट्रप्रेम से सराबोर हो उठा।
तिरंगे के सम्मान में धाम में जुटे युवा
राष्ट्रीय ध्वज की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सांसों में तिरंगा है, मेरी जान तिरंगा है, भगवान तिरंगा है, मेरी शान तिरंगा है, अभिमान तिरंगा है जैसे गीतों और नारों से पूरा परिसर गूंजता रहा। उपस्थित लोगों ने तिरंगे के प्रति अपनी आस्था और सम्मान व्यक्त करते हुए राष्ट्र की एकता, अखंडता और समृद्धि का संकल्प लिया।
'तिरंगा हमारी पहचान और स्वाभिमान का प्रतीक'
कार्यक्रम के संयोजक गंगा सेवक राजेश शुक्ला ने कहा कि 22 जुलाई भारतीय इतिहास का गौरवशाली दिवस है। इसी दिन वर्ष 1947 में संविधान सभा ने पिंगली वेंकैया द्वारा डिजाइन किए गए तिरंगे को भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अंगीकार किया था। उन्होंने कहा कि तिरंगा केवल तीन रंगों का ध्वज नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की पहचान, स्वाभिमान और गौरव का प्रतीक है। इसे देखते ही हर भारतीय के मन में देशभक्ति की भावना जागृत हो जाती है। यह उन लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, संघर्ष और बलिदान की याद दिलाता है, जिन्होंने राष्ट्र की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि जब-जब तिरंगा शान से लहराता है, तब-तब यह देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संदेश देता है।
कार्यक्रम में चंद्रशेखर बर्मा, देवव्रत साहू, शालिनी शर्मा, गीतिका वीर्यवंशी, दुष्यंत यादव, कामिनी वर्मा, साक्षी वर्मा, सुमन उपाध्याय, रेशमी सिंह सहित अनेक लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और राष्ट्रध्वज के सम्मान में आयोजित इस कार्यक्रम को सफल बनाया।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी