श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के स्वर्ण शिखर का क्षतिग्रस्त हिस्सा लॉकर में सुरक्षित, मंदिर न्यास ने कहा- सोना गायब होने की खबर भ्रामक

 


—मंदिर न्यास और वाराणसी मंडलायुक्त ने किया खबरों का खंडन, आईआईटी मद्रास की टीम करेगी संरचनात्मक जांच

—अप्रैल में ओलावृष्टि के दौरान क्षतिग्रस्त हुआ था शिखर का एक हिस्सा, संरक्षण के लिए वैज्ञानिक जांच और तकनीकी परामर्श की प्रक्रिया जारी

वाराणसी, 14 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के स्वर्ण शिखर के क्षतिग्रस्त होने और उससे सोना गायब होने की खबरों को मंदिर न्यास और वाराणसी परिक्षेत्र के मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने भ्रामक एवं निराधार बताया है। मंदिर न्यास ने स्पष्ट किया है कि क्षतिग्रस्त शिखर का हिस्सा मंदिर के लॉकर में सुरक्षित रखा गया है। वहीं, मंडलायुक्त ने भी सोना गायब होने की खबरों का खंडन करते हुए लोगों से अपुष्ट सूचनाओं पर विश्वास नहीं करने और उन्हें आगे प्रसारित करने से बचने की अपील की है।

अप्रैल में क्षतिग्रस्त हुआ था शिखर का हिस्सा

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने बुधवार अपराह्न जारी बयान में बताया कि अप्रैल, 2026 में श्री काशी विश्वनाथ धाम के मुख्य मंदिर के गर्भगृह के ऊपर वायव्य कोण पर स्थापित शिखर का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। इस हिस्से को सुरक्षित निकालकर मंदिर के लॉकर में यथास्थिति रखा गया है। न्यास ने इससे संबंधित सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रसारित खबरों को तथ्यहीन और भ्रामक करार दिया है।

न्यास के अनुसार, मंदिर धार्मिक महत्त्व के साथ-साथ ऐतिहासिक एवं पुरातात्त्विक दृष्टि से भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। ऐसे में शिखर की मरम्मत और संरक्षण का कार्य जल्दबाजी में करने के बजाय विशेषज्ञों के तकनीकी परामर्श और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप कराया जा रहा है, ताकि मंदिर की मूल संरचना और ऐतिहासिक विरासत सुरक्षित रह सके।

आईआईटी मद्रास की टीम ने किया निरीक्षण, नवंबर में फिर पहुंचेगी

मंदिर न्यास ने शिखर के संरक्षण एवं मरम्मत के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास से तकनीकी परीक्षण और परामर्श लेने की प्रक्रिया शुरू की है। संस्थान की विशेषज्ञ टीम धाम का स्थलीय निरीक्षण कर चुकी है और अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जुलाई, 2026 में प्रस्तुत की थी। रिपोर्ट में प्राकृतिक पत्थर और लकड़ी पर पर्यावरणीय प्रभावों के कारण होने वाले क्षरण का उल्लेख किया गया है। साथ ही संरक्षण कार्य शुरू करने से पहले संबंधित सामग्रियों का सूक्ष्म विश्लेषण और आवश्यक तकनीकी जांच कराने की सलाह दी गई है। इसका उद्देश्य संरचना की वास्तविक स्थिति का आकलन कर वैज्ञानिक पद्धति के आधार पर संरक्षण की उपयुक्त कार्ययोजना तैयार करना है।

न्यास के अनुसार, आईआईटी मद्रास की विशेषज्ञ टीम नवंबर, 2026 में मुख्य मंदिर परिसर का दोबारा निरीक्षण करेगी। निरीक्षण और आवश्यक परीक्षणों के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके आधार पर मंदिर की संरचनात्मक सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा उसकी धार्मिक, ऐतिहासिक एवं पुरातात्त्विक महत्ता बनाए रखने के लिए जरूरी उपाय किए जाएंगे।

मंडलायुक्त ने भी किया खबरों का खंडन

वाराणसी परिक्षेत्र के मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने भी बयान जारी कर कहा कि मंदिर के शिखर, गुंबद या कलश से सोना गायब होने अथवा लापता होने के संबंध में सोशल मीडिया पर प्रसारित खबरें पूरी तरह भ्रामक और असत्य हैं। उन्होंने बताया कि लगभग तीन माह पूर्व ओलावृष्टि के दौरान मंदिर के प्रवेश द्वार के ठीक ऊपर स्थित गुंबद या कलश का एक हिस्सा टूटकर नीचे गिर गया था। टूटे हुए हिस्से को मंदिर प्रशासन की सुरक्षित अभिरक्षा में रखा गया है। मंदिर की संरचनात्मक मजबूती और स्थिरता का आकलन करने के लिए आईआईटी मद्रास को अध्ययन का जिम्मा सौंपा गया है, जिसके लिए आवश्यक भुगतान भी किया जा चुका है।

मंडलायुक्त के अनुसार, आईआईटी मद्रास की टीम इस माह के अंत तक मंदिर का निरीक्षण करने आएगी। विशेषज्ञों की रिपोर्ट मिलने के बाद उनके सुझावों और तकनीकी आकलन के आधार पर आवश्यक मरम्मत कार्य कराया जाएगा। उन्होंने आमजन से अपील की कि सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही खबरों की पुष्टि किए बिना उन पर भरोसा न करें और न ही उन्हें आगे साझा करें।

अधिवक्ता ने शिकायत कर उठाए थे स्वर्ण कलश की सुरक्षा पर सवाल

इस मामले में वाराणसी के तेलियाबाग निवासी अधिवक्ता नित्यानंद राय ने 29 सितंबर को मंडलायुक्त के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र भेजकर शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि मंदिर के उत्तरी द्वार के ठीक ऊपर दो स्थानों से स्वर्ण कलश गायब हैं। अधिवक्ता के अनुसार, इस संबंध में मंदिर प्रशासन से जानकारी मांगी गई, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने यह भी कहा था कि मंदिर की वेबसाइट पर शिखर से सोना हटाए जाने के संबंध में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। अधिवक्ता ने अपने पत्र में मंदिर से पूर्व में सोना-चांदी चोरी होने की घटनाओं का उल्लेख करते हुए स्वर्ण शिखर की मौजूदा स्थिति स्पष्ट करने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की थी।

शिखर पर लगी स्वर्ण परत को लेकर भी जताई चिंता

अधिवक्ता नित्यानंद राय ने शिकायत में दावा किया था कि स्वर्ण शिखर के अन्य हिस्सों में भी छोटे-छोटे पैच से सोना गायब है। उन्होंने कुछ हिस्सों पर लगी स्वर्ण परत के हिलने का भी उल्लेख किया और आशंका जताई कि तेज हवा या अन्य गतिविधियों के कारण परत के हिस्से गिर सकते हैं। उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच कर उचित कार्रवाई किए जाने की मांग की थी।

मंदिर प्रशासन से श्वेतपत्र जारी करने की मांग

अधिवक्ता ने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन से धाम परिसर में जहां-जहां सोना और चांदी लगाई गई है, उसका विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मंदिर में स्थापित स्वर्ण एवं रजत संरचनाओं की स्थिति, उनकी सुरक्षा और उनसे संबंधित आवश्यक जानकारियों को लेकर एक श्वेतपत्र जारी किया जाना चाहिए। साथ ही, यह जानकारी मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराने की मांग की है। फिलहाल मंदिर न्यास और मंडलायुक्त ने सोना गायब होने की खबरों को खारिज करते हुए क्षतिग्रस्त हिस्से के सुरक्षित रखे होने की जानकारी दी है। शिखर की वास्तविक संरचनात्मक स्थिति और संरक्षण के लिए आवश्यक उपायों को लेकर अब आईआईटी मद्रास की विस्तृत तकनीकी जांच और रिपोर्ट पर नजर रहेगी।-------

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी