श्री कुमार षष्ठी पर काशी विश्वनाथ धाम में भगवान कार्तिकेय विधिवत पूजे गए, किया विशेष अनुष्ठान
वाराणसी,20 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में श्री कुमार षष्ठी (स्कंद षष्ठी) के पावन अवसर पर शनिवार को काशी विश्वनाथ धाम स्थित भगवान कार्तिकेय के विग्रह का वैदिक रीति-रिवाजों एवं शास्त्रोक्त विधि-विधान के अनुसार विशेष पूजन-अर्चन किया गया। इस अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर के आचार्यों एवं शास्त्रियों ने भगवान कार्तिकेय का मंत्रोच्चार, पूजन, अर्चन तथा विशेष अनुष्ठान श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ संपन्न कराया।
मंदिर न्यास के अनुसार, पूजन के दौरान भगवान कार्तिकेय के श्री चरणों में पुष्प, फल एवं नैवेद्य अर्पित कर समस्त जनकल्याण, सुख-समृद्धि एवं राष्ट्र की उन्नति की मंगलकामना की गई। बताया गया कि स्कंद षष्ठी का पर्व भगवान शिव एवं माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र भगवान कार्तिकेय की आराधना का विशेष अवसर माना जाता है। इस दिन भगवान कार्तिकेय के पूजन से साहस, तेज, विजय तथा आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। पूजन-अर्चन के उपरांत मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी भगवान कार्तिकेय की कृपा एवं आशीर्वाद पाने के लिए पूरे श्रद्धाभाव से पूजन अर्चन किया।
बताते चले कि, हिंदू धर्म में स्कंद षष्ठी का विशेष महत्व माना जाता है, जिसे हर महीने शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर मनाया जाता है। यह दिन भगवान कार्तिकेय को समर्पित होता है, जिन्हें भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र के रूप में पूजा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्कंद षष्ठी का व्रत विशेष रूप से उन दंपत्तियों के लिए फलदायी माना जाता है जो संतान सुख की कामना करते हैं। इसके साथ ही यह व्रत जीवन की बाधाओं को दूर करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में भी सहायक माना जाता है। भगवान कार्तिकेय को स्कन्द, मुरुगन और कुमारस्वामी के नाम से भी जाना जाता है। भगवान कार्तिकेय की उपासना करने से व्यक्ति के जीवन में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।-----------
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी