श्री काशी विश्वनाथ धाम परिसर के प्राचीन पीपल वृक्ष के संरक्षण के लिए विशेष पहल
—वृक्ष को आगामी 100 से 200 वर्षों तक सुरक्षित और सजीव रखने की प्रक्रिया अपनाई गई
वाराणसी, 25 फरवरी (हि.स.)। श्री काशी विश्वनाथ धाम परिसर में स्थित प्राचीन पीपल के वृक्ष के दीर्घकालीन सरंक्षण के लिए मंदिर न्यास ने विशेष पहल की है। इस प्राचीन वृक्ष को आगामी 100 से 200 वर्षों तक सुरक्षित और सजीव बनाए रखने के उद्देश्य से बुधवार को वैज्ञानिक तथा पारंपरिक विधियों के समन्वय से उपचार की प्रक्रिया प्रारंभ की गई।
मंदिर न्यास के अनुसार पीपल के वृक्ष पर औषधियों के साथ नीम के तेल का मिश्रण तैयार कर छिड़काव किया गया। यह संपूर्ण प्रक्रिया जैविक पद्धति से संपन्न की गई। उपचार में लगभग 1200 लीटर गंगाजल तथा त्रिवेणी का जल सम्मिलित किया गया, जिससे पवित्रता और शुद्धता का विशेष ध्यान रखा गया। वृक्ष की वर्तमान अवस्था के बारे में डॉ. प्रशांत ने बताया कि इसकी पत्तियाँ पूर्णतः पीली हो गई हैं, जो हरितहीनता तथा पोषक तत्त्वों की कमी के स्पष्ट संकेत हैं। सामान्य पत्तियों की तुलना में इस वृक्ष की पत्तियों में अंतर स्पष्ट दिखाई देता है। यह स्थिति पोषक तत्त्वों के अभाव के पारंपरिक लक्षणों को दर्शाती है। यदि समय रहते उपचार न किया जाए तो भविष्य में गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसी कारण नियमित अंतराल पर वृक्ष का उपचार एवं छिड़काव निरंतर जारी रखा जाएगा, जिससे यह प्राचीन पीपल वृक्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए भी श्रद्धा और आस्था का केंद्र बना रहे। इस अवसर पर प्रो.एस.पी. सिंह, डॉ. कल्याण बर्मन, ओम प्रकाश तथा तेजनाथ वर्मा भी उपस्थित रहे। सभी ने बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना की कि इस प्राचीन वृक्ष की कीर्ति और गरिमा बनी रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी