सावन मास के शिवरात्रि पर श्री काशी विश्वनाथ दरबार में जलाभिषेक के लिए उमड़े शिवभक्त

 


-घरों और छोटे-बड़े शिवालयों में रूद्राभिषेक,श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में लगाई आस्था की डुबकी

वाराणसी, 11 अगस्त (हि.स.)। सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि यानी सावन शिवरात्रि पर मंगलवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम में बाबा के जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं और कांवड़ियों का सैलाब उमड़ पड़ा। भोर में मंगला आरती के बाद बाबा विश्वनाथ के पावन ज्योतिर्लिंग के जलाभिषेक और दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से मंदिर परिक्षेत्र का वातावरण शिवमय हो उठा।

प्राचीन दशाश्वमेध और शीतला घाट समेत विभिन्न गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। इसके बाद शिवभक्त बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए बांस फाटक से ही कतारबद्ध होने लगे। जलाभिषेक के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं में प्रयागराज से आए कांवड़ियों की संख्या विशेष रूप से अधिक रही। कांवड़ियों के जत्थे बोल बम के जयकारे लगाते हुए बाबा के दरबार की ओर बढ़ते रहे।

सावन शिवरात्रि के अवसर पर काशी के छोटे-बड़े सभी शिवालयों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही। भक्तों ने शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के साथ रुद्राभिषेक कराया और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा-अर्चना की। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपने घरों में भी रुद्राभिषेक कराया। शिवालयों में जलाभिषेक के बाद श्रद्धालु नंदी के कान में अपनी मनोकामनाएं कहते नजर आए। इस दौरान छोटे बच्चों में भी विशेष उत्साह देखने को मिला।

शिव आराधना समिति के डॉ. मृदुल मिश्र ने बताया कि सावन का पूरा महीना काशीपुराधिपति बाबा विश्वनाथ को समर्पित माना जाता है, लेकिन सावन शिवरात्रि और प्रदोष का विशेष धार्मिक महत्व है।

इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना तथा जलाभिषेक करने की विशेष मान्यता है। मान्यता है कि सावन शिवरात्रि का व्रत रखने और श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की आराधना करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

उन्होंने कहा कि शिवरात्रि का पर्व शिवभक्तों और कांवड़ियों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होता। बाबा विश्वनाथ के दरबार में जलाभिषेक के लिए दूर-दराज से श्रद्धालुओं के पहुंचने से काशी पूरी तरह शिवमय नजर आई।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी