श्री काशी विश्वनाथ का झूलनोत्सव श्रृंगार देख शिवभक्त निहाल, दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब

 






श्रावणी पूर्णिमा पर बाबा का विशेष श्रृंगार,शिव परिवार को श्रद्धालुओं ने झूला झुलाया

वाराणसी, 28 अगस्त (हि.स.)। श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन) के अवसर पर शुक्रवार शाम परम्परागत रूप से श्री काशी विश्वनाथ और उनके परिवार को दिव्य व भव्य झूलनोत्सव श्रृंगार किया गया। बाबा की पंचबदन चल रजत प्रतिमा को झूले पर विराजमान कराने के बाद महंत परिवार के सदस्यों ने दीक्षित मंत्र से गर्भगृह में बाबा की चल प्रतिमा का पूजन किया। झूले का बंधन हिला कर बाबा को झूला झुलाया। इसके उपरांत सप्तर्षि आरती के अर्चकों ने क्रमश: बाबा को सपरिवार झूला झुलाया।

शिवपरिवार को झूले पर विराजमान देख श्रद्धालु आह्लादित दिखे। बाबा के परिवार को झूला झुलाने के लिए शिवभक्तों का सैलाब काशी विश्वनाथ धाम में उमड़ पड़ा। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में सप्तर्षि आरती की पूर्णता का संकेत मिलते ही टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास से बाबा की पंचबदन प्रतिमा मंदिर ले जाने की तैयारी शुरू हो गई। महंत परिवार के सदस्यों ने बाबा को सिंहासन पर विराजमान कराया । इसके बाद परिसर हर हर महादेव के उद्घोष से गूंज उठा। महंत आवास से बाबा की पंचबदन रजत चल प्रतिमा को गाजे-बाजे के साथ श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए रवाना किया गया।

—बैंड की धुन पर गूंजा ‘ॐ नमः शिवाय’, महादेव के स्वागत में उमड़ा भक्ति का सैलाब

रामनगर स्थित 36वीं वाहिनी पीएसी के बैंड ने टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास से बाबा के धाम तक शिवभक्तों की झड़ी लगा दी। महादेव के प्रति काशी की अगाध आस्था को सुरों में ढ़ाल कर जवानों ने आध्यात्मिक छटा बिखेर दी। 36वीं वाहिनी पीएसी के बैंड ने विनोद सिंह के नेतृत्व में महंत आवास से बाबा के धाम तक शिवभक्ति की ऐसी धुन छेड़ी कि पूरा वातावरण हर-हर महादेव और ॐ नमः शिवाय के जयघोष से गूंज उठा। बैंड की मधुर धुनों पर ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘मेरी झोपड़ी के भाग खुल जाएंगे, महादेव आएंगे’ की धुन लगातार गूंजती रही। जैसे-जैसे बैंड बाबा के धाम की ओर बढ़ता गया, राह में खड़े काशीवासियों और श्रद्धालुओं का उत्साह भी बढ़ता गया। किसी ने हाथ जोड़कर महादेव को नमन किया तो किसी ने जयकारे लगाकर वातावरण को शिवमय कर दिया। पीएसी के जवानों की वर्दी, कदमों की लय और वाद्ययंत्रों से निकलती शिव आराधना की धुन ने इस यात्रा को अद्भुत आध्यात्मिक रंग दे दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो काशी की गलियों से होकर स्वयं बाबा विश्वनाथ के स्वागत में भक्ति का संगीत उनके धाम तक पहुंच रहा हो। महंत आवास से बाबा के धाम तक बैंड की यह सुरमयी यात्रा श्रद्धा, परंपरा और काशी की अनूठी शिवभक्ति का साक्षात दृश्य बन गई।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी