सभी सामाजिक व्यवस्थाओं का समाधान हिन्दू कुटुम्ब व्यवस्था में : चंद्रमोहन
—राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष: वाराणसी में जगह—जगह हिन्दू सम्मेलन
वाराणसी, 11 जनवरी (हि.स. )। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना के शताब्दी वर्ष में रविवार को धर्म नगरी काशी में जगह—जगह हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। चौक स्थित सिद्धेश्वरी बस्ती के सिद्धपीठ नरसिंह मठ में आयोजित हिन्दू सम्मेलन में संघ के क्षेत्र ग्राम्य विकास संयोजक चन्द्रमोहन ने कहा कि व्यक्ति की प्रथम पाठशाला उसका परिवार रहता है। सभी सामाजिक व्यवस्थाओं का समाधान हिन्दू कुटुम्ब व्यवस्था में है। परिवार में अपनी क्षेत्रीय भाषा, क्षेत्रीय भोजन, अपना पहनावा भारतीय संस्कृति से प्रभावित गृहसज्जा, धर्मस्थलों का भ्रमण एवं परिवार के साथ दिन में कम से कम एक भजन होना ही चाहिए।
नागरिक कर्तव्यों का उल्लेख कर कहा कि राष्ट्र के अनुशासन (संविधान) को मानना बाध्यकारी है।
सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि अन्नपूर्णा मंदिर के महन्त पप्पू महाराज ने कहा कि जिस प्रकार सभी नदियां अन्तत: समुद्र में मिलती हैं। उसी प्रकार सभी दर्शन सनातन धर्म में विलीन हो जाते हैं। सेवानिवृत्त प्रो. संगीता खन्ना ने परिवार ईकाई को संवारने के लिए माताओं के संस्कारित होने पर बल दिया। धन्यवाद ज्ञापन संकठा मन्दिर के महन्त अतुल शर्मा ने किया।
इसी क्रम में नई सड़क स्थित सनातन धर्म इण्टर कॉलेज में आयोजित हिन्दू सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काशी विभाग के विभाग प्रचारक नितिन ने कहा कि हिन्दू जब भी असंगठित हुआ, समाज विखण्डित हुआ है। प्राचीन व्यवस्था में हम अपने पड़ोसी के साथ अपनत्व के भाव के साथ रहते थे। जातिगत वैमनस्य ने सामाजिक ताने—बाने को छिन्न—भिन्न् कर दिया। बतौर मुख्य अतिथि कबीर मठ लहरतारा के स्वामी गोविन्द दास ने हिन्दू समाज की जातिगत समस्याओं को डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता रामतारक आन्ध्रा आश्रम के प्रबन्धक वी.सुन्दर शास्त्री ने की।
इसी क्रम में भेलूपुर के मानस नगर स्थित शंकुलधारा पोखरा के निकट आयोजित हिन्दू सम्मेलन में मुख्य वक्ता दिल्ली पत्रकारिता विभाग जेएनयू के प्रो. राकेश उपाध्याय ने कहा कि हिन्दू समाज कला को पूजने वाला शांतिप्रिय समाज रहा। हम रसायन विद्या, गणित, संगीत, चित्रकारी में निपुण थे। बर्बर शक्तियों ने इस बात का लाभ लेकर हम पर आक्रमण किया। बाद के कालखण्ड में शिवाजी एवं महाराणा प्रताप जैसे वीरों ने तलवारों से तलवार टकरायी और संघर्ष काल में भी भारतीय संस्कृति को सुरक्षित रखा। हिन्दू सम्मेलन का मूल उद्देश्य यह है कि सभी जाति, बिरादरी एक साथ बैठकर चलना, मिलना, उठना, बैठना सीखे।
मुख्य अतिथि गुरुद्वारा गुरुबाग के सरदार रंजीत सिंह ने कहा कि धर्म पर संकट आने पर धर्म एवं संस्कृति के प्रति ईमानदार रहे एवं धर्मांतरण से बचे। कैलाश मठ बिरदोपुर के स्वामी रविशंकरा नन्द, गायत्री विद्यालय के संस्थापक श्रीप्रकाश दूबे ने भी अपने विचार हिन्दू सम्मेलन में रखे। संचालन अनूप ने किया।
इसी क्रम में लंका के माधव मार्केट स्थित माधव पार्क में आयोजित हिन्दू सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र सम्पर्क प्रमुख मनोज ने कहा कि भारत का इतिहास इस तथ्य का गवाह है कि भगवान राम जब समाज के अंतिम व्यक्ति 'शबरी' के पास उसका जूठा बेर खाने पहुंचते है, तब समाज में अन्त्योदय की भावना प्रबल होती है। सामाजिक समरसता से ही छुआछूत जैसी मानसिकता का निदान हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस्लामिक शासन के समय हिन्दूओं पर जजिया कर लगाया गया, धर्म स्थलों के नाम में परिवर्तन किया गया। ऐसे शासक भी रहें जो एकमन जनेऊ उतरवाने के बाद ही भोजन ग्रहण करते थे। मुख्य अतिथि दण्डी स्वामी राजगुरु मठ पीठाधीश्वर अनंतानन्द स्वामी ने कहा कि हिन्दू सम्मेलन सनातन समाज के अस्तित्व के लिए आवश्यक है। अधर्म के विरुद्ध मौन का त्याग करना चाहिए। भगवान राम वनवासी थे पर अधर्मी रावण को स्वर्ण लंका से खींचकर नष्ट किया। अध्यक्षता सेवानिवृत्त् प्रो0 दीनानाथ सिंह ने की। इसी क्रम में काशी दक्षिण भाग के भगवानपुर स्थित तारानगर चौराहे पर आयोजित हिन्दू सम्मेलन को झारखण्ड केन्द्रीय विश्वविद्यालय रांची के कुलाधिपति प्रो.जय प्रकाश लाल एवं केशरीपुर रोहनिया स्थित डीह बाबा मन्दिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम को भाग प्रचारक आदर्श ने सम्बोधित किया।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी