गुरू पूर्णिमा पर्व के पूर्व संध्या पर काशी में गुरूपीठों और आश्रमों में शिष्यों की उमड़ी भीड़
वाराणसी, 28 जुलाई (हि.स.)। गुरु वंदना के महापर्व गुरु पूर्णिमा के पूर्व संध्या पर मंगलवार शाम उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में चहुंओर बंदउ गुरु पद पदुम परागा..का भाव दिखा। अपने गुरुजनों के चरणों में शीश नवानें के लिए देश-विदेश से हजारों शिष्य दोपहर बाद से ही गुरूपीठों और आश्रमों में पहुंचने लगे। पड़ाव स्थित अघोर पीठ श्री सर्वेश्वरी समूह संस्थान देवस्थानम में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ता रहा। गुरू के प्रति आस्था प्रकट करने के लिए दूर दराज से आये शिष्यों का झुण्ड आश्रम में पूर्वांह से ही पहुंचने लगा। श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला पूरी रात रहेगा। यहीं नजारा रविन्द्रपुरी स्थित अघोरपीठ बाबा कीनाराम स्थली में दिखा।
गुरू पूर्णिमा पर श्रद्धालु पीठाधीश्वर बाबा सिद्धार्थ गौतम राम के दर्शन पूजन के पूर्व औघड़ अघोरेश्वर की समाधियों का पूजन करेंगे। उधर, संत मत अनुयायी आश्रम मठ गड़वाघाट, शिवाला रविन्द्रपुरी स्थित बाबा कीनाराम स्थली क्रीं कुंड, सर्वेश्वरी समूह आश्रम पड़ाव में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ने लगा है। महाश्मशान मणिकर्णिका घाट स्थित सतुआ बाबा आश्रम, खोजवां कश्मीरीगंज स्थित राममंदिर, पटिया स्थित अष्टादशभुजा मंदिर में भी चहल-पहल है।
—पड़ाव श्री सर्वेश्वरी समूह ने जारी किया वर्ष भर के जनसेवा कार्यों का विस्तृत विवरण
गुरू पूर्णिमा के पूर्व संध्या पर मंगलवार को अघोर पीठ, श्री सर्वेश्वरी समूह संस्थान देवस्थानम्, अवधूत भगवान राम कुष्ठ सेवा आश्रम, पड़ाव ने वर्ष भर के जनसेवा कार्यों का विस्तृत विवरण पेश किया। आश्रम में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान श्री सर्वेश्वरी समूह के अध्यक्ष बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम ने श्री सर्वेश्वरी समूह कि वार्षिक-पत्रिका ‘अघोरेश्वर-स्मारिका वर्ष 2026’ का लोकार्पण भी किया।
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए गुरूपद संभव राम ने कहा कि आजकल के युवक-युवतियाँ आधुनिकता की चकाचौंध में अपने बड़े-बुजुर्गों और संत-महापुरुषों के दिखाए मार्गों की उपेक्षा और अनादर कर रहे हैं, उन पर चलने का प्रयत्न नहीं कर रहे हैं। युवा समाज के राजनेताओं, उद्योगपतियों आदि का ही अनुसरण करते हैं। सर्वेश्वरी समूह के मंत्री डॉ. एस. पी. सिंह ने सेवा कार्यो की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आश्रम के प्रधान कार्यालय तथा उसकी शाखाओं से प्राप्त वार्षिक प्रतिवेदन के अनुसार गत् गुरुपूर्णिमा से इस गुरुपूर्णिमा के पूर्व तक कुल 88,390 रोगियों की चिकित्सा की गयी। रक्त–दान भी किया गया। बहुत-से शिविरों में पैथोलॉजी की भी व्यवस्था थी। इस वर्ष पर्यावरण-संरक्षण व वन्य-जीव संवर्धन बहुत उत्कृष्ट रहा। 2,10,500 से अधिक पौधरोपण हुआ। संस्था की प्रेरणा और पहल से छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में दो लाख से अधिक बीज गोले यानि सीड बाल पहाड़ों पर बिखेरे गए। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में स्थान दिया गया है। नरसिंहगढ़ (मध्य प्रदेश) में भी स्वयंसेवकों ने एक लाख से अधिक बीज गोलों का रोपण किया। जशपुर आश्रम में चाय की खेती ने स्थानीय आदिवासी पलायन को रोककर रोजगार तो दिया ही है, इस वर्ष पिपरमेंट और कोको की खेती भी इसी उद्देश्य से प्रारम्भ की गयी है। अत्यधिक गर्मी के चलते मानव-सेवा के साथ-साथ पक्षियों के संरक्षण के लिए नगरों और गाँवों में इनके दाना-पानी की व्यवस्था की गई। देशी गो-पालन, देशी बीज संरक्षण एवं जल-संरक्षण को बल दिया गया। जाड़े में जरुरतमंदों को कम्बल, रजाई व शाल देश के विभिन्न भागों के साथ-साथ नेपाल के थारू समुदाय में भी वितरित किये गए। उन्होंने बताया कि अवधूत भगवान राम नर्सरी विद्यालय के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त विद्यार्थियों को मेडल, प्रशस्ति-पत्र व छात्रवृति प्रदान की गयी। इसी प्रकार काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर दर्शन-शास्त्र में प्रथम स्थानप्राप्त विद्यार्थियों को अघोराचार्य बाबा कीनाराम और बाबा राजेश्वर राम तथा अघोरेश्वर भगवान राम एवं बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम स्वर्ण-पदक प्रदान कर सम्मानित किया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी