(राउंडअप) काशी और सोमनाथ भारतीय सभ्यता के दो अमर स्वर : आनंदीबेन पटेल
—सनातन केवल मंदिरों की दीवारों में ही नही, अपितु भारत की चेतना में : योगी आदित्यनाथ
—श्री काशी विश्वनाथ धाम में भव्यता के साथ मना सोमनाथ स्वाभिमान पर्व
वाराणसी, 11 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक दिवसीय दौरे पर सोमवार को वाराणसी पहुंचे। पुलिस लाइन हेलीपैड से उनका काफिला काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचा। दोनों विशिष्टिजनों ने बाबा विश्वनाथ के दरबार में विधि-विधान से दर्शन-पूजन किया और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।
मंदिर के त्रयंबकेश्वर सभागार में आयोजित सोमनाथ संकल्प पूजन कार्यक्रम में भी दोनों राजनेता शामिल हुए। यहां बीएचयू के छात्रों द्वारा तैयार सोमनाथ की प्रतिकृति पार्थिव ज्योतिर्लिंग की स्थापना कर जलाभिषेक और पूजन भी किया। इस अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” हमें उस दिव्य सोमनाथ मंदिर की हजार वर्षों की अविचलित यात्रा का स्मरण कराता है, जिसने अनेक आक्रमणों, संघर्षों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी आस्था, ऊर्जा और अस्तित्व को अक्षुण्ण बनाए रखा। सोमनाथ राष्ट्र के स्वाभिमान का ज्योति-स्तंभ है और आज, उसी गौरवगाथा की श्रृंखला में बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर की पावन धरती पर यह ज्योतिर्लिंग कार्यक्रम आयोजित हो रहा है। यह संयोग नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की अद्भुत आध्यात्मिक एकता का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि काशी और सोमनाथ भारतीय सभ्यता के दो अमर स्वर हैं। एक ने समुद्र की लहरों के मध्य आस्था का दीप जलाए रखा, तो दूसरे ने गंगा की अविरल धारा के साथ ज्ञान, मोक्ष और अध्यात्म का संदेश संपूर्ण विश्व को दिया। जब सोमनाथ की घंटियाँ और काशी की आरती एक साथ गूंजती हैं, तब ऐसा प्रतीत होता है मानो संपूर्ण भारत अपनी सनातन आत्मा का उद्घोष कर रहा हो। उन्होंने कहा कि धर्म का प्रकाश कभी बुझता नहीं, सत्य का सूर्य कभी अस्त नहीं होता। यह मंदिर हमें सिखाता है कि विनाश की आयु क्षणभंगुर होती है, पर सृजन सनातन होता है। आक्रमणकारी तलवारें समय के गर्त में विलीन हो जाती हैं, किन्तु संस्कृति की चेतना शाश्वत रहती है।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति केवल उसकी आर्थिक समृद्धि, भौतिक संसाधनों या तकनीकी प्रगति में नहीं होती, बल्कि उसकी सांस्कृतिक चेतना, ऐतिहासिक स्मृति और आध्यात्मिक आधार में निहित होती है। जब कोई समाज अपनी आस्था से जुड़ा रहता है, अपनी जड़ों को पहचानता है और अपनी विरासत के प्रति सम्मान एवं सजगता बनाए रखता है, तभी उसकी सभ्यता दीर्घकाल तक जीवंत और सशक्त बनी रहती है। राज्यपाल ने कहा कि यह नया भारत आत्मगौरव से भरा हुआ भारत है। यह नया भारत अपनी विरासत पर गर्व करने वाला भारत है।
महोत्सव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सोमनाथ मंदिर और काशी विश्वनाथ धाम दोनों ही भारत के इतिहास और सनातन संस्कृति की अदम्य शक्ति के प्रतीक हैं। सनातन संस्कृति पर आक्रमण तो हो सकते हैं, लेकिन उसे कभी पराजित नहीं किया जा सकता। विनाश क्षणिक होता है, जबकि सृजन शाश्वत होता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मार्गदर्शन व प्रेरणा देशवासियों को मिल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से हम सब एक भारत, श्रेष्ठ भारत की संकल्पना को साकार होते देख रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हम सब जानते हैं मोहम्मद गोरी से लेकर मुगलों तक, कई विदेशी आतताइयों ने हमारी आध्यात्मिक, सांस्कृतिक पहचान को नष्ट करने का प्रयास किया। औरंगजेब ने बाबा विश्वनाथ के प्राचीन मंदिर को ध्वस्त कर एक गुलामी का ढांचा भी यहां खड़ा किया, लेकिन वो भारत की आत्मा को तोड़ नही पाए। वो नही समझ पाए, सनातन केवल मंदिरों की दीवारों में ही नही, अपितु भारत की चेतना में बसता है और भारत की चेतना, आत्मा को अजर, अमर मानकर चलती है, यही भारत की अजरता, अमरता का शास्वत शंखनाद भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक विरासत में हम सबके सामने झलकती है। जिन्होंने सनातन को मिटाने का प्रयास किया, आज वह स्वयं मिट्टी में मिल चुके हैं। आज उन आक्रांताओ का नाम लेने वाला कोई नही है, लेकिन काशी विश्वनाथ धाम हो या सोमनाथ महादेव का मंदिर ये दोनों भारत के स्वाभिमान की गाथा को आगे बढ़ा रहे हैं। इससे पूर्व राज्यपाल आनंदीबेन पटेल एवं मुख्यमंत्री सहित अन्य अतिथियों का स्वागत पूर्व मंत्री एवं विधायक डॉ नीलकंठ तिवारी ने किया। इस अवसर पर आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम की भी प्रस्तुति हुई
राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने किए बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व, अटूट आस्था की गौरव गाथा के अवसर पर सोमनाथ संकल्प महोत्सव कार्यक्रम में शामिल होने के लिए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में पहुंचे। यहां बाबा के दरबार में उन्होंने दर्शन-पूजन किया। सोमनाथ तथा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के अर्चकों ने एक साथ पूजन-अर्चन संपन्न कराया। राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने सोमनाथ से आए जल से काशी विश्वनाथ का जलाभिषेक किया और बाबा के दरबार में माथा टेक कर लोकमंगल व प्रदेशवासियों के कल्याण की प्रार्थना की। मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में राज्यपाल को अंगवस्त्र व रुद्राक्ष की माला भेंट की। मंदिर प्रांगण में पीत वस्त्र धारण किए मंदिर के शास्त्रीगण, बालिकाओं/महिलाओं ने शंख ध्वनि तथा वाद्य यंत्र कलाकारों ने डमरू आदि के जरिए राज्यपाल व मुख्यमंत्री का स्वागत किया। राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने हर हर महादेव की जयकार संग हाथ जोड़कर श्रद्धालुओं का अभिवादन स्वीकार किया।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी