गौरी केदारेश्वर महादेव का हुआ भव्य हरियाली श्रृंगार, अर्धनारीश्वर स्वरूप की झांकी देख आह्लादित हुए शिवभक्त

 


मंदिर परिसर की चौखट से गर्भगृह तक फूलों और अशोक-कामनी के पत्तों से की गई आकर्षक सजावट

वाराणसी, 31 अगस्त (हि.स.)। भाद्रपद माह की चतुर्थी तिथि पर सोमवार को काशी के केदारघाट स्थित गौरी केदारेश्वर महादेव मंदिर में पहली बार भव्य हरियाली श्रृंगार का आयोजन किया गया। कुमार स्वामी मठ के सानिध्य में मंदिर के महंत राजकुमार पांडेय के संयोजन में दोपहर 12 बजे से बाबा का विशेष हरियाली श्रृंगार शुरू हुआ। इस दौरान मंदिर परिसर फूलों और हरे पत्तों से सुसज्जित नजर आया।

शिवाला घाट स्थित पंडित राजकुमार पांडेय के आवास से बाबा के अर्धनारीश्वर स्वरूप की प्रतिमा को आकर्षक पालकी पर विराजमान कर गाजे-बाजे के साथ मंदिर परिसर लाया गया। श्रद्धालुओं ने जयकारों के बीच पालकी का स्वागत किया। मंदिर पहुंचने के बाद बाबा का बेला, गुलाब, चंपा, चमेली के फूलों तथा अशोक और कामनी के पत्तों से भव्य श्रृंगार किया गया। इसके बाद बाबा को 56 व्यंजनों का भोग अर्पित कर विधिवत आरती की गई।

अर्धनारीश्वर स्वरूप में सजे बाबा के दर्शन के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने दर्शन-पूजन कर बाबा का आशीर्वाद लिया और हरियाली श्रृंगार की अलौकिक झांकी को निहारा।

मंदिर के महंत राजकुमार पांडेय ने बताया कि मंदिर में पहली बार आयोजित इस हरियाली श्रृंगार का उद्देश्य पूरे मंदिर परिसर को हरित और मनोहारी स्वरूप प्रदान करने के साथ बाबा को अर्धनारीश्वर रूप में सजाना था। इस अवसर पर वैदिक विद्वानों ने बाबा का रुद्राभिषेक भी कराया। शाम को आयोजित भजन संध्या में केदारनाथ की टीम ने भजनों की मनोहारी प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत पंडित राजकुमार पांडेय ने किया, जबकि कथा कार्यक्रम का संचालन राकेश कुमार पांडेय ने किया।

—दो भागों में विभाजित है मंदिर का शिवलिंग

गौरी केदारेश्वर मंदिर में स्थापित शिवलिंग को लेकर भी विशेष धार्मिक मान्यता है। मान्यता के अनुसार यहां का अद्भुत शिवलिंग दो भागों में विभाजित है। एक भाग में भगवान शिव और माता पार्वती तथा दूसरे भाग में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काशी को तीन प्रमुख खंडों में विभाजित माना गया है, जिनमें दो खंड भगवान शिव और एक खंड भगवान विष्णु से संबंधित है। इसी क्रम में विश्वेश्वर, केदारेश्वर और ओंकारेश्वर की अलग-अलग रूपों में आराधना की जाती है। मान्यता है कि काशी विश्वनाथ यहां राजा के रूप में पूजित हैं, जबकि केदारेश्वर स्वरूप में भगवान भोलेनाथ गुरु के रूप में पूज्य माने जाते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी