आयुर्वेद का पालन करेंगे तो प्रचण्ड ताप व लू में भी रहेंगे स्वस्थ, फ्रिज का एकदम चिल्ड जल पीने से बचे : प्रो.आनन्द चौधरी

 


—कच्चे आम से बना आम पना लू से बचाने का सबसे असरदार उपाय

वाराणसी, 25 मई (हि.स.)। प्रचंड गर्मी और लू के बढ़ते प्रभाव के बीच काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान, आयुर्वेद संकाय के रस शास्त्र एवं भैषज्य कल्पना विभाग के प्रोफेसर आनन्द चौधरी ने लोगों से आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अधिक ज्येष्ठ मास (पुरुषोत्तम मास) में शरीर को स्वस्थ रखने के लिए फ्रिज का अत्यधिक ठंडा पानी और शीतल पेय पदार्थों से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पाचन शक्ति कमजोर होती है। उन्होंने सलाह दी कि प्यास न लगने पर भी नियमित अंतराल पर मटके का शीतल जल पीते रहना चाहिए।

प्रो. चौधरी ने बताया कि गर्मी में पारंपरिक भारतीय पेय पदार्थ किसी औषधि से कम नहीं हैं। कच्चे आम से तैयार आम पना लू से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है, क्योंकि यह शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखता है। वहीं बेल का शरबत पेट को ठंडा रखने और डिहाइड्रेशन से बचाने में सहायक है। सत्तू का घोल शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के साथ-साथ शीतलता भी प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि तेज धूप और अत्यधिक गर्मी का सीधा असर शरीर पर पड़ता है, जिससे लू लगना, निर्जलीकरण, चक्कर आना और अत्यधिक थकान जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में आयुर्वेद में बताए गए घरेलू और प्राकृतिक उपाय शरीर को भीतर से ठंडा और तरोताजा बनाए रखने में कारगर साबित होते हैं।

प्रो. चौधरी के अनुसार रसोई में उपलब्ध कई सामान्य चीजें भी गर्मी से राहत देने में प्रभावी हैं। धनिया बीज का पानी, पुदीने का शरबत या चटनी शरीर की आंतरिक गर्मी कम करते हैं। रातभर भिगोई गई सौंफ का पानी सुबह पीने से पित्त दोष शांत होता है और शरीर को ठंडक मिलती है। यदि शरीर में अधिक गर्मी महसूस हो तो माथे और छाती पर चंदन का लेप लगाने से तुरंत राहत मिलती है।

उन्होंने लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, दोपहर में तेज धूप से बचने, हल्के सूती वस्त्र पहनने तथा मौसमी फलों और इलेक्ट्रोलाइट युक्त तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी। आयुर्वेद विभाग ने मठ्ठा, नारियल पानी और नींबू आधारित पेय पदार्थों को भी गर्मी में लाभकारी बताया है। साथ ही खीरा, तरबूज, खरबूजा, लौकी, टमाटर और नींबू जैसे शीतल एवं जलयुक्त खाद्य पदार्थों को दैनिक आहार में शामिल करने पर जोर दिया गया है।

प्रो. चौधरी ने चेतावनी दी कि तेज गर्मी के दौरान चक्कर आना, सिरदर्द, मतली, मानसिक भ्रम, शरीर का अत्यधिक तापमान, निर्जलीकरण और बेहोशी जैसे लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने हीटस्ट्रोक को चिकित्सकीय आपातस्थिति बताते हुए जरूरत पड़ने पर तत्काल 108 या 102 आपातकालीन हेल्पलाइन पर संपर्क करने की सलाह दी। साथ ही नागरिकों से भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी मौसम संबंधी अपडेट और लू की चेतावनियों पर नियमित ध्यान देने का आग्रह किया।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी