(अपडेट) वाराणसी गंगा नदी में फिर उफान, 11वीं एनडीआरएफ बोट पेट्रोलिंग और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए टीमें तैयार

 




वाराणसी, 16 अगस्त (हि.स.)। पहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश का असर अब उत्तर प्रदेश से होकर गुजरने वाली गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर पर दिखाई देने लगा है। प्रदेश की धर्म नगरी वाराणसी (काशी) में कुछ दिनों तक स्थिर रहने और घटने के बाद गंगा के जलस्तर में एक बार फिर तेजी से बढ़ोतरी शुरू हो गई है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, शनिवार सुबह आठ बजे वाराणसी में गंगा का जलस्तर 64.58 मीटर दर्ज किया गया। इसके बाद से जलस्तर में करीब 3.6 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से लगातार बढ़ोतरी हो रही है। बीते 24 घंटे में गंगा का जलस्तर 86 सेंटीमीटर बढ़ चुका है।

जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए जल पुलिस ने जनसुरक्षा को देखते हुए गंगा में नावों के संचालन पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी है। बढ़ते जलस्तर के कारण शहर के सभी 84 घाटों के संपर्क मार्ग जलमग्न हो गए हैं। घाटों के निचले हिस्से में स्थित छोटे-बड़े मंदिर भी बढ़ती लहरों की चपेट में आ गए हैं। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने भी सतर्कता बढ़ा दी है।

इधर, गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि के मद्देनजर 11वीं एनडीआरएफ ने नदी क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है। कमांडिंग ऑफिसर अनूप सिंह बिष्ट के मार्गदर्शन में एनडीआरएफ की टीमें 24 घंटे, सातों दिन नदी क्षेत्र में तैनात रहकर नियमित बोट पेट्रोलिंग और सतत निगरानी कर रही हैं।

एनडीआरएफ की टीमें नाविकों, यात्रियों और आमजन को जिला प्रशासन तथा जल पुलिस की ओर से जारी सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन करने और नदी में अनावश्यक रूप से प्रवेश न करने के लिए लगातार जागरूक कर रही हैं।

इसके अलावा एनडीआरएफ की मेडिकल टीम वॉटर एंबुलेंस के साथ गंगा नदी क्षेत्र में तैनात है। किसी भी आकस्मिक स्थिति में नदी क्षेत्र में मौजूद लोगों को तत्काल प्राथमिक चिकित्सा और आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

11वीं एनडीआरएफ के कमांडिंग ऑफिसर अनूप सिंह बिष्ट ने बताया कि गंगा के जलस्तर और नदी की परिस्थितियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ की टीमें त्वरित प्रतिक्रिया और आवश्यक बचाव कार्य के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी