वाराणसी में गंगा नदी फिर उफान पर,चेतावनी बिंदु की ओर बढ़ा जल स्तर
—सहायक नदी वरूणा का पानी तटवर्ती क्षेत्र में पहुंचा,लोगों की मुश्किलें बढ़ी
वाराणसी, 29 अगस्त (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी सहित आसपास के जनपदों में कुछ दिनों तक जल स्तर में कमी आने के बाद गंगा नदी एक बार फिर उफान पर है। पहाड़ों और मैदानी इलाकों में हो रही लगातार बारिश का असर गंगा और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। वाराणसी में शनिवार को गंगा का जलस्तर तेजी से अब चेतावनी बिंदु की ओर बढ़ रही हैं। गंगा के बढ़ते जलस्तर के साथ सहायक नदी वरुणा का पानी भी तटवर्ती इलाकों में पहुंचने लगा है, जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
केंद्रीय जल आयोग के राजघाट स्थित गेज स्टेशन के अनुसार शनिवार सुबह 10 बजे गंगा का जलस्तर 68.10 मीटर दर्ज किया गया। इस दौरान जलस्तर करीब चार सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा था। शुक्रवार सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 67.76 मीटर था और उस समय बढ़ाव की गति करीब आधा सेंटीमीटर प्रति घंटे थी। बनारस में गंगा का चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर, जबकि खतरे का निशान 71.26 मीटर है। केंद्रीय जल आयोग और जिला प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
गंगा के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव के बावजूद शहर के सभी 84 घाटों के संपर्क मार्ग पहले से ही जलमग्न हैं। दशाश्वमेध और प्राचीन शीतलाघाट पर होने वाली विश्वप्रसिद्ध शाम की गंगा आरती अब परिवर्तित स्थानों और छतों पर कराई जा रही है। जिला प्रशासन ने नदी के निचले इलाकों और तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र छोड़कर राहत चौकियों में जाने की अपील की है।
गंगा का पानी बढ़ने से अस्सी, तुलसी, शिवाला, केदार, हरिश्चंद्र, पाण्डेय, मुंशी, अहिल्याबाई, शीतला, प्राचीन दशाश्वमेध, दशाश्वमेध, त्रिपुरा भैरवी और ललिता घाट पर श्रद्धालुओं की परेशानी बढ़ गई है। गंगा स्नान के लिए आने वाले लोगों को पानी बढ़ने के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह के लिए भी लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है। मणिकर्णिका घाट के ऊपरी प्लेटफॉर्म और हरिश्चंद्र घाट की गलियों में शवदाह किया जा रहा है। गंगा में तेज बहाव और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नौकायन भी बंद कर दिया गया है।
नौकायन बंद होने से नाविकों की रोजी-रोटी प्रभावित
अहिल्याबाई घाट के नाविक रतन और राकेश उर्फ पप्पू ने बताया कि भादो माह की शुरुआत हो गई है और इस समय बाढ़ व बारिश का मौसम रहता है। गंगा की तेज लहरों को देखते हुए सुरक्षा कारणों से नौकायन बंद होने से नाविकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। उन्होंने कहा कि घाटों के डूबे रहने से पर्यटकों की आवाजाही भी कम हो जाती है और रोजी-रोटी लगभग ठप हो जाती है। घाटों पर छतरियां लगाकर कर्मकांड कराने वाले पंडों को भी इस स्थिति में परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके बावजूद सभी गंगा के शांत होने की प्रार्थना कर रहे हैं।
वरुणा भी तटवर्ती इलाकों में बढ़ी
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर उसकी सहायक नदी वरुणा पर भी पड़ा है। वरुणा का पानी कॉरिडोर को पार कर तटवर्ती क्षेत्रों की ओर बढ़ने लगा है। सरैया, नक्खीघाट, ढेलवरिया, हुकुलगंज, बघवानाला और पिपरहवाघाट के आसपास के तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंचने लगा है। इससे इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
प्रशासन और केंद्रीय जल आयोग की निगरानी के बीच लोगों की नजर अब गंगा के जलस्तर और बढ़ाव की रफ्तार पर टिकी है। जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो निचले इलाकों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।------------
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी