श्रावण मास की शिवरात्रि पर गंगा किनारे गूंजा राष्ट्रभक्ति का संदेश, श्रद्धालुओं ने सेवा-स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प
वाराणसी,11 अगस्त (हि.स.)। श्रावण मास के शिवरात्रि पर मंगलवार को उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में दशाश्वमेधघाट पर नमामि गंगे ने उपस्थित श्रद्धालुओं को राष्ट्रभक्ति, सेवा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलाया।
कार्यक्रम संयोजक गंगा सेवक राजेश शुक्ला के नेतृत्व में राष्ट्रध्वज लेकर 'हर-घर तिरंगा अभियान' के अंतर्गत मां गंगा की आरती उतारी गई। लोगों से आह्वान किया गया कि श्रावण माह को सेवा, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और सामाजिक सहभागिता का माह बनाने का संकल्प लें। प्रत्येक बूंद का सम्मान तथा प्रत्येक पौधे का संरक्षण करें। प्रकृति से जितना लें, उतना उसे लौटाने का भी संकल्प लें। यही श्रावण का वास्तविक संदेश है और समृद्ध, सुरक्षित तथा विकसित भारत की आधारशिला भी है।
श्रवण की शिवरात्रि पर गंगा स्नान और गंगाजल कावड़ में भरने के लिए उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को गंगा सेवक राजेश शुक्ला ने संदेश दिया कि देवाधिदेव महादेव स्वयं प्रकृति बोध के देवता हैं। उनकी जटाओं में प्रवाहित गंगा, मस्तक पर सुशोभित चंद्रमा, कंठ का सर्प, नंदी जी और उनके गण, हमें प्रकृति के साथ सहअस्तित्व का संदेश देते हैं। सनातन संस्कृति में प्रकृति का यही नवोन्मेष शिव-आराधना से जुड़कर जीवन को संयम, सेवा और समरसता का मार्ग दिखाता है। आयोजन में कांवड़ियों ने भी पूरे उत्साह से भागीदारी की।
-------------
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी