वाराणसी : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में अकादमिक–इंडस्ट्री सहयोग को नई दिशा
—कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी के मार्गदर्शन में पाँच एमओयू पर हस्ताक्षर
वाराणसी, 20 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी स्थित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में अकादमिक संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। विद्यापीठ के अर्थशास्त्र विभाग एवं रामनगर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के संयुक्त प्रयास से चार प्रमुख एमएसएमई इकाइयों के साथ कुल पाँच समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
यह समझौते विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी के मार्गदर्शन में संपन्न हुए, जिनका उद्देश्य छात्रों को उद्योगों से जोड़कर उन्हें व्यावहारिक ज्ञान, कौशल विकास और रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण प्रदान करना है। इन एमओयू के अंतर्गत छात्रों को इंटर्नशिप, शैक्षिक भ्रमण, परामर्श सेवाएँ (कंसलटेंसी), संयुक्त फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) तथा एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम (ईडीपी) जैसे अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। जिन चार एमएसएमई संस्थानों के साथ यह समझौते किए गए, उनमें अन्नपूर्णा गैसेज़ प्राइवेट लिमिटेड, सिद्धि विनायक पॉलीटेक्स इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड, एडीएच इंक प्राइवेट लिमिटेड तथा अन्नपूर्णा इंडस्ट्रीज़ शामिल हैं।
इस अवसर पर उद्योग जगत से क्रमशः डी. एस. मिश्रा, सुनील कुमार अग्रवाल, अंजनी अग्रवाल एवं सुरेन्द्र सोनी उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय की ओर से वित्त अधिकारी प्रो. सुधीर कुमार शुक्ल, कुलसचिव डॉ. सुनीता पांडेय तथा आउटरीच डीन प्रो. संजय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं शिक्षक मौजूद रहे।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह नीति अकादमिक संस्थानों और उद्योगों के बीच मजबूत साझेदारी को शिक्षा की गुणवत्ता, कौशल विकास और नवाचार का आधार मानती है। उन्होंने कहा कि एनईपी बहुविषयक शिक्षा, कौशल-आधारित प्रशिक्षण और अनुभवजन्य अधिगम (एक्सपीरिएंशियल लर्निंग) को प्रोत्साहित करती है। उद्योगों के साथ ऐसे सहयोग छात्रों को वास्तविक कार्य अनुभव, समस्या-समाधान क्षमता और उद्यमशीलता की समझ विकसित करने में सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि इन एमओयू के माध्यम से छात्र इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट कार्य, लाइव केस स्टडी और उद्योग संवाद जैसे अवसरों का लाभ उठा सकेंगे, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लक्ष्यों के अनुरूप हैं। साथ ही, यह पहल क्षेत्रीय एमएसएमई को सशक्त बनाने, स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कार्यक्रम में अर्थशास्त्र विभाग के शिक्षक प्रो. राजीव कुमार, डॉ. उर्जस्विता सिंह, प्रो. पारस नाथ मौर्य, डॉ. पारिजात सौरभ एवं डॉ. गंगाधर उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समन्वयन प्रो. राकेश कुमार तिवारी ने आभार व्यक्त किया।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी