ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों के बच्चों को भी मिलेगी शिक्षा, ट्रस्ट ने शुरू किए 11 शिक्षण केंद्र
वाराणसी में करीब 300 बच्चे हो रहे लाभान्वित, सरकारी स्कूलों में नामांकन के साथ शिक्षा और खेल गतिविधियों से जोड़ने की पहल
वाराणसी, 06 नवंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद में ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा अब प्रभावित नहीं होगी। इन बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सामाजिक संस्था आशा ट्रस्ट ने एक सराहनीय पहल की है। संस्था की ओर से वाराणसी जनपद के चोलापुर और आराजीलाइन विकासखंड में 11 ईंट-भट्ठों पर अस्थायी अनौपचारिक शिक्षण केंद्रों का संचालन शुरू किया गया है। इन केंद्रों के माध्यम से करीब 300 बच्चों को शिक्षा और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।
बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक अपने परिवारों के साथ रोजगार की तलाश में वाराणसी के ईंट-भट्ठों पर आते हैं। इन परिवारों के बच्चे भी वर्ष का अधिकांश समय भट्ठों पर ही बिताते हैं। लगातार स्थान परिवर्तन और परिवार के साथ कामकाज वाले स्थान पर रहने के कारण उनकी नियमित स्कूली शिक्षा बाधित हो जाती है। ऐसे बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए आशा ट्रस्ट ने अस्थायी अनौपचारिक शिक्षण केंद्रों की शुरुआत की है। इस पहल में ईंट-भट्ठा संचालकों का भी सहयोग मिल रहा है।
ट्रस्ट के समन्वयक वल्लभाचार्य पाण्डेय ने शुक्रवार को बताया कि बिहार और झारखंड में दीपावली तथा छठ पर्व संपन्न होने के बाद प्रवासी श्रमिकों का भट्ठों पर आना शुरू हो जाता है। इसके साथ ही संस्था के कार्यकर्ता श्रमिक परिवारों के बच्चों का सर्वेक्षण करते हैं और उन्हें आसपास के सरकारी विद्यालयों में नामांकित कराने का प्रयास करते हैं। विद्यालय की अवधि समाप्त होने के बाद इन बच्चों को भट्ठों पर संचालित अनौपचारिक शिक्षण केंद्रों में पढ़ाया जाता है। यहां बच्चों के लिए विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों के साथ खेलकूद और मनोरंजक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि केंद्रों पर आने वाले सभी बच्चों को संस्था की ओर से गर्म कपड़े, किताबें, कॉपियां और स्लेट भी उपलब्ध कराई जाती हैं, ताकि संसाधनों के अभाव में उनकी पढ़ाई बाधित न हो। मानसून शुरू होने पर प्रवासी श्रमिकों की अपने गृह जनपदों और राज्यों में वापसी होने लगती है। इसके साथ ही इन शिक्षण केंद्रों का संचालन भी चार महीने के लिए स्थगित कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि जनपद में संचालित सभी 11 शिक्षण केंद्रों के माध्यम से लगभग 300 बच्चे इस पहल का लाभ उठा रहे हैं। केंद्रों के संचालन और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने में दीन दयाल सिंह, प्रदीप सिंह, अमित कुमार, रमेश प्रसाद, अनीता देवी, आंचल कुमारी, विद्या देवी, आंचल, अरुण कुमार, नीलम प्रधान, रचना, शशिकला, लालमणि, अमृता, सुनीता और सौरभ चन्द्र सहित अन्य सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ट्रस्ट की यह पहल उन बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण बन रही है, जिनकी पढ़ाई अक्सर परिवार के साथ होने वाले पलायन और रोजगार की परिस्थितियों के बीच छूट जाती है।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी