कजरी-लोकगीतों में गूंजा श्यामा प्रसाद का राष्ट्रभाव, नाट्य मंचन ने जीवंत किया संघर्ष और बलिदान
— 125वीं जयंती वर्ष में सांस्कृतिक आयोजन,भाजपा एनजीओ प्रकोष्ठ व संस्कृति मंत्रालय की पहल
वाराणसी, 17 अगस्त (हि.स.)। “श्यामा मुखर्जी हउवे देशवा क शान पिया, हउवे बड़ा महान पिया ना...” यह लोकगीत सोमवार की शाम बाबतपुर स्थित एक होटल के सभागार में गूंजा। अवसर रहा जनसंघ संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर भारतीय जनता पार्टी एनजीओ प्रकोष्ठ और संस्कृति मंत्रालय की पहल पर आयोजित विशेष सांस्कृतिक आयोजन का।
लोक गायिका सुमन अग्रहरि ने लोकधुनों से जनसंघ संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धासुमन अर्पित किया। इसके बाद नागरी नाटक मंडली के छात्रों ने डॉ. मुखर्जी के जीवन, राजनीतिक संघर्ष, राष्ट्र की अखंडता के संकल्प और बलिदान पर आधारित नाटक का प्रभावी मंचन कर उनके व्यक्तित्व को जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि भाजपा काशी क्षेत्र अध्यक्ष अशोक चौरसिया ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का राष्ट्रवादी चिंतन और देश की एकता-अखंडता के लिए उनका संघर्ष सदैव प्रेरणा देता रहेगा। डॉ. मुखर्जी ने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देकर 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जनसंघ की स्थापना की। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35ए का विरोध करते हुए उन्होंने बिना परमिट कश्मीर जाने का आंदोलन किया और गिरफ्तारी के बाद उनका निधन हुआ।
काशी क्षेत्र अध्यक्ष ने कहा कि बड़ी खुशी की बात है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयत्नों से आज आजादी के 79वें साल में हम सब पश्चिम बंगाल जहां पर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी का जन्म हुआ था। उस राज्य में भी हम सब भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाने में सफल हुए हैं । उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अनुच्छेद 370 और 35ए हटाकर डॉ. मुखर्जी के सपने को साकार किया गया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से देश की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध होकर कार्य करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में राज्यमंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का पूरा जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण और त्याग की गाथा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. एके त्यागी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी के 125वें जयंती वर्ष पर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने राष्ट्र प्रथम की भावना से कार्य किया और जम्मू-कश्मीर में धारा 370 का विरोध करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया। उनके विचार आज भी राष्ट्र निर्माण को दिशा देने में महत्वपूर्ण हैं।
भाजपा जिलाध्यक्ष राम सकल पटेल ने कहा कि डॉ. मुखर्जी को एक विशिष्ट राष्ट्र निर्माता, प्रख्यात शिक्षाविद और दूरदर्शी नेता थे।उन्होंने अपना जीवन भारत की एकता, गरिमा और प्रगति के लिए समर्पित कर दिया था। एनजीओ प्रकोष्ठ काशी क्षेत्र के संयोजक विपिन पाठक ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संपूर्ण जीवन युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है। नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन रंगकर्मी सुमन पाठक ने किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी