पच्चीस हजार करोड़ रूपये की दो मेगा परियोजनाएं बदलेंगी वाराणसी की तस्वीर: मंडलायुक्त

 

वाराणसी, 15 जुलाई (हि.स.)। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वाराणसी की दो महत्वाकांक्षी आधारभूत संरचना परियोजनाओं-गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर और वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है। इन दोनों परियोजनाओं पर लगभग 25 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा। वाराणसी मंडल के आयुक्त एस. राजलिंगम ने इसे शहर के विकास का ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि ये केवल सड़क परियोजनाएं नहीं, बल्कि आने वाले कई दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया शहरी विकास का दूरदर्शी विजन हैं।

मंडलीय सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में मंडलायुक्त ने बुधवार काे बताया कि श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय आबादी के लगातार बढ़ते दबाव को देखते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप यातायात ढांचा विकसित करना समय की मांग थी। उन्होंने कहा कि यदि अभी से व्यापक योजना के तहत आधारभूत संरचना विकसित नहीं की गई तो आने वाले वर्षों में शहर की यातायात व्यवस्था गंभीर चुनौती का सामना करेगी।

उन्होंने बताया कि वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर की लंबाई लगभग 43.218 किलोमीटर होगी, जबकि गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर विभिन्न लूप, डिस्पर्सल नेटवर्क और कैरिज-वे सहित लगभग 46 किलोमीटर लंबा होगा। इस प्रकार दोनों परियोजनाओं की कुल लंबाई लगभग 90 किलोमीटर होगी। उन्होंने कहा कि किसी भी भारतीय शहर को जाम से राहत दिलाने के उद्देश्य से स्वीकृत यह सबसे बड़ी फ्लैगशिप परियोजनाओं में से एक है।

राजलिंगम ने कहा कि दोनों कॉरिडोरों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी व्यापक कनेक्टिविटी होगी। शहर के भीतर और बाहरी क्षेत्रों के बीच निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न स्थानों पर प्रवेश और निकास (एक्सेस) की सुविधा उपलब्ध होगी। कॉरिडोर का डिजाइन इस प्रकार तैयार किया गया है कि यातायात का बड़ा हिस्सा एलिवेटेड नेटवर्क पर स्थानांतरित हो सके, जिससे शहर के भीतर जाम की समस्या में उल्लेखनीय कमी आएगी।

उन्होंने बताया कि सावन, देव दीपावली, महाशिवरात्रि और अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान लाखों श्रद्धालु वाराणसी पहुंचते हैं। ऐसे अवसरों पर यह एलिवेटेड नेटवर्क एक प्रभावी वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराएगा। श्रद्धालु अपनी गाड़ियों से सीधे एलिवेटेड कॉरिडोर के माध्यम से आगे बढ़ सकेंगे और निर्धारित एक्सेस प्वाइंट से उतरकर गंगा द्वार (भैरव द्वार) के रास्ते काशी विश्वनाथ धाम पहुंच सकेंगे। इससे मौजूदा मार्गों और प्रवेश व्यवस्था पर दबाव कम होगा।

मंडलायुक्त ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से यात्रा का समय घटेगा, वाहनों की औसत गति बढ़ेगी तथा बार-बार रुकने से होने वाली ईंधन की खपत में कमी आएगी। इसके परिणामस्वरूप कार्बन उत्सर्जन और वायु प्रदूषण भी कम होगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

निर्माण अवधि की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर को लगभग तीन वर्ष और गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर को लगभग चार वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। दोनों परियोजनाओं का निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।

कमिश्नर राजलिंगम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले कुछ वर्षों में वाराणसी में कई परिवर्तनकारी परियोजनाएं पूरी हुई हैं। अब इन दो नई मेगा परियोजनाओं के जुड़ने से काशी को विश्वस्तरीय, आधुनिक और सुगम यातायात व्यवस्था वाले शहर के रूप में विकसित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल वर्तमान की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दीपक