वाराणसी : असत्य पर सत्य के विजय का पर्व विजयादशमी धूमधाम से मना,धूं धूं कर जला रावण
— बरेका में रावण,मेघनाथ,कुंभकरण का विशालकाय पुतला जला,पुलिस लाइन में पुलिस परिवार के साथ सीपी ने मनाया दशहरा
वाराणसी, 20 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी काशी में मंगलवार शाम बुराई पर सच्चाई का प्रतीक विजया दशमी पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। रामलीला में जगह-जगह भगवान राम और लंकापति रावण के बीच घनघोर युद्ध में प्रतीक रूप से रावण के मरते ही रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के विशाल पुतले आतिशबाजी के बीच जलाए गए।
वाराणसी में सबसे पहले मलदहिया चौराहे पर रावण का 45 फीट उंचा पुतला दहन किया गया। समाज सेवा संघ की ओर से आयोजित रामलीला में प्रभु श्रीराम ने भाई लक्ष्मण और हनुमान के साथ रावण से युद्ध किया और फिर उसका वध किया। इसके बाद विशाल पुतले में आग लगते ही रावण धूं-धूं कर जलने लगा और पूरा इलाका श्रीराम चंद्र की जय के नारों से गूंज उठा। इस दौरान पूरा मलदहिया क्षेत्र राजा राम की जय के नारों से गूंज उठा। रामलीला के आयोजन का 74 वर्ष रहा। इसी क्रम में बनारस रेल इंजन कारखाना के खेल मैदान में सबसे बड़ा 70 फीट ऊंचा रावण, 60 फीट मेघनाथ, 65 फीट उंचे कुंभकरण के पुतले उल्लासपूर्ण माहौल में जलाए गए। बरेका खेलकूद स्टेडियम में भव्य रामलीला मंचन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि बरेका महाप्रबंधक आशुतोष पंत एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भगवान श्रीराम, माता जानकी एवं भगवान लक्ष्मण की आरती के साथ किया । इस अवसर पर महाप्रबंधक आशुतोष पंत ने सभी को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए स्वस्थ, सुखी एवं मंगलमय जीवन की कामना की।
महाप्रबंधक ने विजयादशमी के पावन पर्व पर बुराई पर अच्छाई की विजय, सत्य एवं धर्म की स्थापना के संदेश को आत्मसात करने का आह्वान करते हुए असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म, अहंकार पर विनम्रता तथा बुराई पर अच्छाई के विजय के प्रतीक महोत्सव मनाने का संदेश दिया।
इसके बाद एस. डी. सिंह के निर्देशन में प्रस्तुत रूपक रामलीला मंचन में राम वनगमन, सीता हरण, वानरों द्वारा सीता की खोज, लंका दहन, हनुमान जी की वापसी एवं विभीषण की शरणागति जैसे प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। इसके अतिरिक्त अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण शक्ति, कुंभकर्ण एवं मेघनाद वध, सुलोचना विलाप तथा राम-रावण युद्ध के दृश्यों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। विभीषण द्वारा रावण की मृत्यु का रहस्योद्घाटन एवं रावण वध के साथ रूपक रामलीला का समापन हुआ। मैदान में अयोध्या, लंका, किष्किंधा पर्वत, समुद्र, अशोक वाटिका समेत कई स्थानों को तैयार किया गया। श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, हनुमान, रावण, कुंभकर्ण बने कलाकारों ने जीवंत प्रस्तुति दी। इसके बाद रावण के विशालकाय पुतले का दहन किया गया। रावण,मेघनाथ,कुंभकर्ण के पुतले के दहन के दौरान जमकर आतिशबाजी होती रही। इस दौरान खेल मैदान पर सुरक्षा का व्यापक प्रबंध किया गया था। श्रद्धालुओं को बैठने के लिए कुर्सियां लगाई गई थीं। इसी क्रम में पुलिस लाइन में पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने पुलिस परिवार के साथ विजयादशमी पर्व मनाया। सीपी ने रावण के पुतले का दहन भी किया।
इस दौरान पुलिस कमिश्नर ने कहा कि दशहरा हमें सिखाता है कि असत्य और अन्याय का अंत निश्चित है। पुलिस भी इसी आदर्श को आत्मसात कर समाज में न्याय और सुरक्षा की स्थापना के लिए सतत प्रयासरत है। उन्होंने दशहरे के महत्व को भी बताया। इस अवसर पर पुलिस कमिश्नर ने पुलिस लाइन में मौजूद पुलिस कर्मियों एवं उनके परिजनों से भी मुलाकात की और सभी को महापर्व की बधाई दी।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी