केन्द्र सरकार ने 12 साल के कार्यकाल में संवाद के बजाय अहंकार को प्राथमिकता दी : कांग्रेस

 

—मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर उपलब्धियों का पोस्टर भी किया जारी

वाराणसी, 27 मई (हि.स.)। केंद्र में नरेन्द्र मोदी सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर बुधवार को उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी में महानगर कांग्रेस कमेटी ने उपलब्धियों पर एक पोस्टर जारी किया। पोस्टर जारी करने के बाद महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने केंद्र सरकार की नीतियों और कार्यशैली पर जमकर निशाना साधा। राघवेन्द्र चौबे ने कहा कि 12 वर्षों का यह दौर उपलब्धियों से अधिक प्रचार, इवेंट प्रबंधन और जनभावनाओं के दोहन का काल साबित हुआ है। संवाद के बजाय अहंकार को प्राथमिकता दी गई। प्रचार की चमक में जनता की पीड़ा छुपाई नहीं जा सकती। जिस सरकार ने “अच्छे दिन” का सपना दिखाया था, उसी दौर में आम नागरिक महंगाई, बेरोजगारी और असुरक्षा के बोझ तले दब गया। महानगर अध्यक्ष ने कहा कि “लोकतंत्र में सरकारें प्रचार से नहीं, जवाबदेही से बड़ी बनती हैं। देश अब नारों से नहीं, 12 वर्षों का स्पष्ट हिसाब मांग रहा है।”

महानगर अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि यदि देश वास्तव में प्रगति कर रहा है तो रसोई गैस, पेट्रोल, डीज़ल और खाद्य पदार्थों की लगातार बढ़ती कीमतों से जनता त्रस्त क्यों है। करोड़ों रोजगार देने के दावे करने वाली सरकार के कार्यकाल में युवा भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक और संविदा व्यवस्था के जाल में उलझकर रह गया। उन्होंने कहा कि सरकार रोजगार कम और विज्ञापन अधिक पैदा कर रही है। “बेटी बचाओ” का नारा ज़मीनी सुरक्षा में परिवर्तित नहीं हो सका। महिलाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराधों ने शासन की संवेदनशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए हैं। बड़े-बड़े भाषणों के बावजूद सीमाओं पर तनाव और आंतरिक अस्थिरता ने सरकार की रणनीतिक तैयारी की पोल खोल दी।

विदेश नीति पर तंज कसते हुए कहा कि “कैमरों की फ्लैश में कूटनीति सफल दिखाई जा सकती है, लेकिन पड़ोसी देशों से बिगड़ते संबंध वास्तविकता को उजागर कर देते हैं।” महानगर अध्यक्ष ने 2016 में नोटबन्दी को देश की आर्थिक संरचना पर “आत्मघाती प्रहार” बताते हुए कहा कि इससे काला धन समाप्त नहीं हुआ, बल्कि छोटे व्यापारी, मजदूर और मध्यम वर्ग आर्थिक रूप से टूट गया। आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का उपयोग निष्पक्षता के बजाय राजनीतिक दबाव बनाने के औजार के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “जो सत्ता के साथ है वह पवित्र, और जो सवाल पूछे वही संदिग्ध घोषित कर दिया जाता है।” बेरोजगारी और महंगाई जैसे मूल मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए समाज में विभाजनकारी विमर्श को बढ़ावा दिया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी