वाराणसी कचहरी विस्थापन का कांग्रेस ने किया विरोध, प्रधानमंत्री मोदी को लिखा पत्र
वाराणसी, 09 मई (हि.स.)। वाराणसी कचहरी के प्रस्तावित विस्थापन का विरोध तेज हो गया है। कांग्रेस पार्टी की वाराणसी महानगर इकाई ने शनिवार को प्रधानमंत्री एवं वाराणसी के सांसद नरेन्द्र मोदी को पत्र भेजकर कचहरी को शहर से बाहर स्थानांतरित करने के बजाए वर्तमान परिसर के विस्तार की मांग उठाई। कांग्रेस नेताओं ने सुझाव दिया कि कचहरी विस्तार के लिए उससे सटी बनारस क्लब की भूमि को अधिग्रहित कर न्यायिक परिसर में शामिल किया जाए।
यह जानकारी कांग्रेस के वाराणसी महानगर अध्यक्ष एवं अधिवक्ता राघवेंद्र चौबे ने दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री को भेजे गए विस्तृत पत्र में काशी की न्यायिक व्यवस्था, जनसुविधा और ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।
राघवेन्द्र चौबे ने कहा कि वाराणसी कचहरी केवल न्यायालय परिसर नहीं, बल्कि पूर्वांचल के लाखों लोगों की न्यायिक आस्था, सामाजिक विश्वास और प्रशासनिक व्यवस्था का केंद्र है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में परिसर में स्थानाभाव की गंभीर समस्या है, जिससे अधिवक्ताओं, वादकारियों और न्यायिक कार्यों में लगातार कठिनाइयां बढ़ रही हैं। हालांकि इसका समाधान कचहरी का विस्थापन नहीं, बल्कि योजनाबद्ध विस्तार है।
उन्होंने कहा कि बनारस क्लब को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है, लेकिन कचहरी को उसके मूल न्यायिक क्षेत्र से हटाना आम जनता और न्याय व्यवस्था, दोनों के हित में नहीं होगा। काशी की ऐतिहासिक कचहरी वर्षों से शहर के केंद्र में विकसित हुई है, जहां प्रतिदिन हजारों लोग न्यायिक कार्यों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में यदि इसे शहर से दूर ले जाया गया, तो गरीब, ग्रामीण, वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं, दिव्यांगजन और दूर-दराज से आने वाले वादकारी सबसे अधिक प्रभावित होंगे। इससे न्याय प्राप्ति महंगी और जटिल हो जाएगी।
महानगर कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि अधिवक्ता समाज और काशीवासियों की स्पष्ट मांग है कि कचहरी का “विस्तारीकरण” किया जाए, “विस्थापन” नहीं। उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित विस्थापन के विरोध में अधिवक्ता समाज पूरी तरह एकजुट है और इसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं करेगा। यह केवल अधिवक्ताओं का आंदोलन नहीं, बल्कि काशी की ऐतिहासिक न्यायिक व्यवस्था और जनसुविधाओं को बचाने का जनआंदोलन है। उन्होंने बताया कि मांग पत्र की प्रतिलिपि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, मंडलायुक्त वाराणसी और जिलाधिकारी वाराणसी को भी भेजी गई है।
वहीं, कांग्रेस से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक सिंह, अधिवक्ता लोकेश सिंह एवं अधिवक्ता वीरेंद्र पंडित ने समर्थन पत्र की प्रतियां दि सेंट्रल बार एसोसिएशन और बनारस बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को सौंपकर अधिवक्ता आंदोलन को समर्थन दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी