वाराणसी : ‘नादयात्रा’ में शास्त्रीय संगीत और कजरी की जीवंत प्रस्तुति, कलाकारों ने बांधा समां

 


वाराणसी, 24 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी करौंदी स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के क्षेत्रीय केंद्र में शुक्रवार को आयोजित मासिक सांगीतिक शृंखला ‘नादयात्रा’ में शास्त्रीय संगीत और पारंपरिक कजरी गायन की मनोहारी प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का आयोजन क्षेत्रीय केंद्र एवं संस्कार भारती, काशी महानगर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नागरी नाटक मंडल ट्रस्ट के सचिव डॉ. अजीत सैगल ने कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए भारतीय शास्त्रीय संगीत और लोक परंपराओं के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। क्षेत्रीय केंद्र के निदेशक डॉ. अभिजीत दीक्षित ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि ‘नादयात्रा’ शृंखला के अंतर्गत अब तक 50 से अधिक सांगीतिक कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किए जा चुके हैं।

इस अवसर पर आनंदिता तिवारी ने संगीत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मा को ब्रह्मानंदसहोदर अनुभूति प्रदान करने वाला साधन है। उन्होंने कहा कि संगीत मनुष्य को ईश्वर से जोड़ता है और जब तक संगीत जीवित है, तब तक संवेदनाएं भी जीवित रहेंगी।

मुख्य प्रस्तुति में प्रो. ऋचा कुमार ने शास्त्रीय गायन की गंभीरता, रागों की भाव-संपन्नता और अभिव्यक्ति की उत्कृष्टता से श्रोताओं का मन मोह लिया। उन्होंने कार्यक्रम का आरंभ ‘धीरे से झुलवो बनवारी हर सांवरिया...’ नामक झूला से किया। इसके बाद ‘नजर भर हेरो घूंघट वाली रे...’ दादरा प्रस्तुत किया। सावन की लोक-सांगीतिक परंपरा को जीवंत करते हुए उन्होंने कई पारंपरिक कजरियों की भी सुमधुर प्रस्तुति दी, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।

युवा गायक भगीरथ जालान ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत गणेश वंदना से की। इसके बाद उन्होंने ‘रोकना डगर मोरे श्याम, मैं तो जात अपनी धाम...’ ठुमरी, ‘बरसन लागी बदरिया रुमझुम के...’, ‘सावन झर लागेला धीरे-धीरे...’ तथा ‘गोरिया पाए नाहीं सैयाँ के सावनवां...’ जैसी कजरियों का भावपूर्ण गायन कर वातावरण को सावनमय बना दिया।

कार्यक्रम में पं. ललित कुमार ने तबले पर प्रभावशाली संगति करते हुए लय और ताल की विविधता से प्रस्तुतियों को सशक्त आधार दिया, जबकि हर्षित उपाध्याय ने संवादिनी की मधुर संगति से गायन में भावात्मक गहराई जोड़ी।

कार्यक्रम का संचालन बीएचयू संगीत एवं मंचकला संकाय के प्रो. कुमार अंबरीश चंचल ने किया। अंत में संस्कार भारती, काशी प्रांत के अध्यक्ष डॉ. आर. वी. शर्मा ने सभी अतिथियों, कलाकारों एवं श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर किशन जालान, श्याम कृष्ण अग्रवाल, डॉ. प्रेम नारायण सिंह, डॉ. अवधेश सिंह सहित अन्य संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी