बुद्ध पूर्णिमा पर सारनाथ में भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेष का दर्शन कर बौद्ध श्रद्धालु आह्लादित
—अलसुबह से दर्शन के लिए देश—विदेश के बौद्ध श्रद्धालु हुए कतारबद्ध,पूरे सारनाथ को पंचशील के झंडों से सजाया गया
वाराणसी, 01 मई (हि.स.)। बुद्ध पूर्णिमा (वैशाख पूर्णिमा )पर शुक्रवार को वाराणसी में भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ स्थित मूलगंध कुटी बौद्ध मंदिर में बड़ी संख्या में अनुयायी भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेष के दर्शन के लिए उमड़ पड़े। कड़ी सुरक्षा के बीच कतारबद्ध बौद्ध अनुयायियों ने भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष का दर्शन किया। हीरा मोती से जड़ित शीशेनुमा जार में तथागत का अस्थि अवशेष मन्दिर के हाल में रखा गया ।
अस्थि अवशेष के दर्शन के लिए थाईलैंड, वियतनाम, श्रीलंका के अलावा देश के महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, बिहार बोध गया, उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती, कुशीनगर, गाजीपुर, जौनपुर, चंदौली,अन्य जिलों से बौद्ध अनुयायी एंव स्थानीय बौद्ध भिक्षु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं । हाल में अस्थि अवशेष के दर्शन के पूर्व विविध धार्मिक अनुष्ठान के बीच उसका विधिवत पूजन किया गया। बौद्ध भिक्षुओं ने विश्व शान्ति और मानवता के कल्याण के लिए भी अस्थि अवशेष की पूजा की। पूजा में बौद्ध मंदिर के भिक्षु चंदिमा, भिक्षु शीलवश, भिक्षु धम्म रत्न, भिक्षु रत्नाकर आदि शामिल रहे। बुद्ध पूर्णिमा पर पूरे सारनाथ इलाके में पंचशील के झंडे लहरा रहे हैं और विद्युत झालरों से बौद्ध मंदिर और मठों को सजाया गया है। बुध पूर्णिमा पर देश—विदेश के बौद्ध श्रद्धालु गुरूवार को ही सारनाथ पहुंच गए थे।
बताते चलें भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेष का दर्शन साल में सिर्फ दो बार ही श्रद्धालुओं को मिलता हैं । भिक्षु चंदिमा महाथेरो के अनुसार, सुबह 6 से 11 बजे तक तथागत बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेष के दर्शन मिलता है। दोपहर 12 से 3 बजे तक धम्म सभा और सांस्कृतिक कार्यक्रम चलता हैं। अपरान्ह 4 बजे डॉ. आंबेडकर स्मारक स्थल (कचहरी) से सारनाथ तक धम्म यात्रा निकाली जाएगी, जबकि शाम 6 बजे धम्मदेशना का आयोजन होगा। महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया परिसर में सामूहिक भोजन दान कार्यक्रम सुबह से रात 10 बजे तक चलेगा।
पूर्णिमा बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए है खासभगवान बुद्ध (सिद्धार्थ ) का जन्म इसी दिन हुआ था। इसी दिन ज्ञान के साथ उनका परिनिर्वाण भी इसी दिन हुआ था। ऐसे में बुद्ध पूर्णिमा बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास और पवित्र है। बौद्ध श्रद्धालु दिन भर विशेष अनुष्ठान और पूजा के साथ रात में विश्व शान्ति की कामना के साथ मूलगंध कुटी बुद्ध मंदिर में 5000 दीप जलाएंगे।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी