विश्व पर्यटन दिवस समारोह की शुरुआत बीएचयू में हेरिटेज वॉक से

 


वाराणसी, 25 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में हेरिटेज वॉक के साथ विश्व पर्यटन दिवस समारोह की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों को विश्वविद्यालय की गौरवशाली विरासत से परिचित कराना था। वॉक में विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों एवं आम लोगों ने सहभागिता की।

यह वॉक कला संकाय के पर्यटन एवं आतिथ्य अध्ययन केंद्र की ओर से विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर आयोजित की जा रही विभिन्न गतिविधियों का हिस्सा थी, जिसे 27 सितंबर को मनाया जाएगा। इस वर्ष के विश्व पर्यटन दिवस की थीम है, “डिजिटल अजेंडा एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टू रीडिज़ाइन टूरिज़्म”।

कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय स्थित श्री विश्वनाथ मंदिर से हुई, जहां कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी के हरी झंडी दिखाने के साथ हेरिटेज वॉक आरंभ हुई। इस अवसर पर प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि हेरिटेज वॉक न केवल पर्यटन को बढ़ावा देती है, बल्कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की समृद्ध विरासत को भी खूबसूरती से सामने लाती है। उन्होंने इसे एक सराहनीय पहल बताते हुए आशा व्यक्त की कि इस तरह की हेरिटेज वॉक प्रत्येक वर्ष आयोजित की जाएगी। कुलपति ने पर्यटन एवं आतिथ्य अध्ययन केंद्र की स्थापना के लिए संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों को बधाई भी दी। इस अवसर पर उपस्थित चिकित्सा विज्ञान संस्थान, बीएचयू के निदेशक प्रो. एस. एन. संखवार ने पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पर्यटन सांस्कृतिक विविधता की गहरी समझ प्रदान करता है तथा हमें विभिन्न स्थानों, लोगों और परंपराओं से परिचित कराता है। हेरिटेज वॉक का मार्ग वैदिक विज्ञान केंद्र से रसायन विज्ञान विभाग, कला संकाय, एसवीडीवी संकाय, भारत कला भवन होते हुए मालवीय भवन तक रहा।

एमटीटीएम के विद्यार्थियों ने वॉक के प्रमुख पड़ावों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। त्रिनेत्र ने विश्वनाथ मंदिर के महत्व तथा पंडित मदन मोहन मालवीय की स्थापना संबंधी दृष्टि के बारे में बताया। हरसिद्ध ने रसायन विज्ञान विभाग के इतिहास पर प्रकाश डाला, जिसकी स्थापना 1935 में विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय के हिस्से के रूप में हुई थी। अन्नू यादव ने प्रतिभागियों को कला संकाय के बारे में जानकारी दी, जिसकी स्थापना 1916 में विश्वविद्यालय के सबसे प्रथम संकाय के रूप में हुई थी और जो सत्य एवं धर्म के मूल्यों से निर्देशित रहा है। अलंकृता ने एसवीडीवी की स्थापना से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों से प्रतिभागियों को अवगत कराया। हर्ष मौर्य ने मालवीय भवन तथा महामना के मूल्यों एवं सिद्धांतों के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार में इसकी भूमिका के बारे में बताया।

वॉक के समापन पर पर्यटन एवं आतिथ्य अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. शायजू ने विद्यार्थियों की सराहनीय सहभागिता एवं उत्साह की प्रशंसा की।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी