काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में “अन-सीन एग्ज़िबिशन 2026” की शुरूआत,72 विद्यार्थियों की कलाकृतियां
—विद्यार्थियों की अनदेखी रचनात्मक प्रतिभाओं को मिला सशक्त मंच
वाराणसी, 02 जून (हि.स.)। क्या कला केवल कला के विद्यार्थियों तक सीमित है? इस प्रश्न का सशक्त उत्तर प्रस्तुत करती है “अन-सीन एग्ज़िबिशन 2026”। इस एग्ज़िबिशन का शुभांरभ मंगलवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के नगर छात्र निकाय स्थित कला सूत्र आर्ट स्टूडियो एवं गैलरी में हुआ। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन विश्वविद्यालय के न्यूरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. विजय नाथ मिश्रा ने किया। इस दौरान प्रो. रंजन कुमार सिंह, डीन ऑफ स्टूडेंट्स, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दोनों अतिथियों ने विद्यार्थियों की रचनात्मक अभिव्यक्तियों की सराहना करते हुए इस पहल को विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक और सृजनात्मक वातावरण को समृद्ध करने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
इस प्रदर्शनी का उद्देश्य विश्वविद्यालय के उन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को मंच प्रदान करना है, जो औपचारिक रूप से ललित कला से जुड़े नहीं हैं, किन्तु चित्रकला, फोटोग्राफी, डिजिटल आर्ट, स्केचिंग तथा अन्य रचनात्मक विधाओं में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। यह प्रदर्शनी उन अनदेखी प्रतिभाओं को सामने लाने का प्रयास है जो अब तक सीमित दायरे में अपनी कला का सृजन कर रही थीं। इस वर्ष प्रदर्शनी के लिए विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों एवं विभागों से 72 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक अपनी कलाकृतियाँ प्रस्तुत कीं। प्राप्त प्रविष्टियों का मूल्यांकन दृश्य कला संकाय के चित्रकला विभाग के सहायक आचार्य डॉ. ललित मोहन सोनी तथा व्यावहारिक कला विभाग के सहायक आचार्य डॉ. आशीष कुमार गुप्ता ने किया। विशेषज्ञों के चयन के उपरांत 32 उत्कृष्ट कलाकृतियों को प्रदर्शनी हेतु चुना गया। प्रदर्शनी में प्रदर्शित कृतियाँ विविध माध्यमों और विचारों का अनूठा संगम प्रस्तुत करती हैं। इनमें चित्रकला, फोटोग्राफी, डिजिटल आर्ट, स्केचिंग तथा मिश्रित माध्यमों की रचनाएँ शामिल हैं, जो युवा कलाकारों की कल्पनाशीलता, नवाचार और संवेदनशील दृष्टिकोण को प्रभावशाली रूप से अभिव्यक्त करती हैं।
अपने संबोधन में प्रो. विजय नाथ मिश्रा ने कहा कि कला केवल सौन्दर्य की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज को नई दृष्टि प्रदान करने का माध्यम भी है। वहीं, प्रो. रंजन कुमार सिंह ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आयोजकों के अनुसार,यह प्रदर्शनी 02 जून से 06 जून 2026 तक आयोजित है। प्रतिदिन प्रातः 10:00 बजे से सायं 5:00 बजे तक आम जनमानस, कला प्रेमियों तथा विश्वविद्यालय समुदाय के लिए खुली रहेगी।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी