भौतिकी विषय में ‘श्री ब्रज किशोर तिवारी स्कॉलरशिप’ की स्थापना के लिए बीएचयू ने किया एमओयू
वाराणसी, 05 जून (हि.स.)। उत्तर प्रदेश में वाराणसी स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को भौतिकी विषय में स्नातकोत्तर अध्ययन कर रहे मेधावी एवं आर्थिक रूप से जरूरतमंद विद्यार्थियों को सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से ‘श्री ब्रज किशोर तिवारी स्कॉलरशिप’ की स्थापना के लिए बीएचयू-अमेरिका फाउंडेशन के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहमति के तहत भौतिकी विभाग के एक पूर्व छात्र से प्राप्त उदार सहयोग से प्रतिवर्ष 25,000 रुपये की राशि वाली कुल नौ छात्रवृत्तियों की स्थापना की जा रही है। दाता ने यह कोष काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के पूर्व छात्र (1940-42) एवं पूर्व प्राध्यापक (1944-1979) स्वर्गीय ब्रज किशोर तिवारी की स्मृति में स्थापित किया है। इसका उद्देश्य शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करना तथा विविध सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के अवसरों का विस्तार करना है। यह जानकारी बीएचयू के जनसम्पर्क अधिकारी ने दी।
बताया कि ब्रज किशोर तिवारी पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक ग्रामीण क्षेत्र में स्थित मध्यमवर्गीय कृषक परिवार से थे। वे अपने गाँव एवं आसपास के क्षेत्र के पहले व्यक्ति थे जिन्होंने एम.एससी. की उपाधि प्राप्त की तथा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य किया। उनके अनेक विद्यार्थी उन्हें अपना मार्गदर्शक मानते थे और स्नातक होने के बाद भी व्यक्तिगत परामर्श के लिए उनके घर आते रहते थे। वे अपने विद्यार्थियों को परिवार के सदस्य जैसा स्नेह और मार्गदर्शन प्रदान करते थे। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से यह छात्रवृत्ति प्रतिवर्ष एम.एससी. (भौतिकी) कार्यक्रम में नामांकित विद्यार्थियों को प्रदान की जाएगी।
इस योजना के अंतर्गत ओपन मेरिट, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तथा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणियों के विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। साथ ही छात्राओं का समुचित प्रतिनिधित्व भी सुनिश्चित किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत एक वर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रम लागू होने के बाद भी यह छात्रवृत्ति योजना लचीले एवं समावेशी स्वरूप में पात्र विद्यार्थियों को सहयोग प्रदान करती रहेगी। इस अवसर पर कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि ब्रज किशोर तिवारी स्कॉलरशिप योग्य एवं जरूरतमंद विद्यार्थियों को सार्थक सहयोग प्रदान करेगी तथा भावी भौतिकविदों और शोधकर्ताओं की नई पीढ़ी के निर्माण में सहायक सिद्ध होगी। पूर्व छात्रों द्वारा प्रेरित इस प्रकार की परोपकारी पहलें विश्वविद्यालय के शैक्षणिक परिवेश को सुदृढ़ बनाती हैं तथा शिक्षा के माध्यम से समाज को लौटाने की संस्कृति को प्रोत्साहित करती हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अरविंद जैन के प्रयासों के प्रति आभार भी जताया।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी